छत्तीसगढ़ में चर्चित कोयला घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस नेताओं ने राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि एजेंसियों ने घोटाले के एक आरोपी की जमानत सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जाली दस्तावेज पेश किए।
कांग्रेस का आरोप
रविवार को पूर्व सीएम भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि –
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आरोपी सूर्यकांत तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान, EOW/ACB ने सह-आरोपी निखिल चंद्राकर का धारा 164 (अब BNSS की धारा 183) के तहत दर्ज बयान का एक जाली दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में पेश किया।
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यह बयान सामान्यत: मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाता है और इसे गोपनीय एवं आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है।
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लेकिन, कांग्रेस के अनुसार, दस्तावेज़ को पेन ड्राइव से कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, और उसमें इस्तेमाल किया गया फ़ॉन्ट न्यायालय द्वारा प्रयुक्त आधिकारिक फ़ॉन्ट से अलग था।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया –
“फोरेंसिक जांच से साफ हुआ है कि दस्तावेज़ में दो अलग-अलग फ़ॉन्ट का इस्तेमाल किया गया। यह दर्शाता है कि बयान मजिस्ट्रेट के सामने नहीं बल्कि कहीं और तैयार किया गया और सुप्रीम कोर्ट में असली बताकर पेश किया गया।”
फर्जीवाड़े की शिकायत
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और अधिवक्ता गिरीश चंद्र देवांगन ने इस मामले में रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।
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शिकायत में तीन EOW/ACB अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने धारा 164 के तहत दर्ज किए जाने वाले बयानों को पहले से तैयार किया और बाद में जांच और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इन्हें असली दस्तावेज़ की तरह इस्तेमाल किया।
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देवांगन ने इससे पहले 12 सितंबर को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (सतर्कता) के पास भी इसी मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
क्यों है यह मामला गंभीर?
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धारा 164 (BNSS की धारा 183) के तहत आरोपी या गवाह का बयान मजिस्ट्रेट की निगरानी में दर्ज होना चाहिए।
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यह दस्तावेज़ न्यायालय के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ न्यायिक प्रक्रिया के साथ धोखाधड़ी मानी जाती है।
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कांग्रेस का आरोप है कि एजेंसियों द्वारा फर्जी दस्तावेज़ पेश करना न सिर्फ मामले को कमजोर करता है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।
✅ संक्षेप में – छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने EOW और ACB पर सुप्रीम कोर्ट में जाली दस्तावेज़ पेश करने का आरोप लगाते हुए इसे गंभीर न्यायिक धोखाधड़ी बताया है। अब मामला न्यायालय और उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों की निगरानी में है।