छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में रेलवे की ज़मीन पर सालों से झुग्गी बनाकर रह रहे 32 परिवारों के मकान शनिवार को बुलडोज़र एक्शन में तोड़ दिए गए। कार्रवाई के बाद आक्रोशित पीड़ित परिवार अपने छोटे बच्चों के साथ नगर निगम दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मेयर पहुंचे समझाने
प्रदर्शन की खबर मिलते ही नगर निगम के मेयर संजय पांडे मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की। लेकिन नाराज़ लोग विस्थापन और पुनर्वास की मांग को लेकर अड़े रहे और किसी भी समझाइश को मानने को तैयार नहीं दिखे।
क्या है पूरा मामला?
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रेलवे प्रशासन ने शनिवार को अपने आईडब्ल्यू सेक्शन के अधिकारियों की मौजूदगी में तोड़ू दस्ता भेजा।
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टीम ने रेलवे की जमीन पर बने अवैध मकानों को बिना देरी सीधे ढहा दिया।
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कब्जाधारियों को अपना घरेलू सामान हटाने का मौका तक नहीं दिया गया।
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नतीजा, कई घरों के अलमारी, बर्तन, टीवी, पंखे, कपड़े और अन्य कीमती सामान मलबे में दबकर खराब हो गए।
लोगों का आरोप: गलत समय पर कार्रवाई
पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासन ने त्योहार के समय कार्रवाई करके उन्हें सड़क पर ला खड़ा किया है। दीपावली नज़दीक है और ऐसे में बेघर हुए परिवार छोटे बच्चों के साथ त्योहार कैसे मनाएंगे?
कुल मिलाकर, रेलवे प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जगदलपुर में बेघर परिवारों का गुस्सा भड़क गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनके पुनर्वास और विस्थापन को लेकर क्या कदम उठाता है।