भारतीय भारोत्तोलक प्रीतिस्मिता भोई ने एशियाई युवा खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। उन्होंने 44 किलो भार वर्ग में 158 किलो वजन उठाकर न केवल स्वर्ण पदक जीता बल्कि विश्व रिकॉर्ड भी कायम कर दिया।
स्नैच और क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन
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स्नैच में प्रीतिस्मिता ने केवल पहली लिफ्ट में सफलता पाई और 66 किलो वजन उठाया।
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हालांकि दो लिफ्ट असफल रहीं, लेकिन उन्होंने इसकी भरपाई क्लीन एंड जर्क में कर दी।
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क्लीन एंड जर्क में उन्होंने क्रमशः 87, 90 और 92 किलो उठाए।
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कुल मिलाकर उन्होंने 158 किलो वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
यह इन खेलों में भारत का तीसरा स्वर्ण पदक है।
संघर्ष से सफलता तक
प्रीतिस्मिता की कहानी उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी उनकी उपलब्धि।
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जब वह सिर्फ दो साल की थीं, उनके पिता का निधन हो गया था।
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मां ने अकेले प्रीतिस्मिता और उनकी बहन का पालन-पोषण किया।
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दोनों बहनें शुरू में एथलेटिक्स करती थीं, लेकिन बाद में कोच गोपाल दास के सुझाव पर वेटलिफ्टिंग में आईं।
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उनकी मां शुरुआत में तैयार नहीं थीं, लेकिन समझाने पर राजी हुईं।
पहले भी कर चुकी हैं कमाल
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प्रीतिस्मिता ने पिछले साल विश्व यूथ चैंपियनशिप (40 किलो वर्ग) में भी स्वर्ण पदक जीता था।
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इसके अलावा, वह राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं, जहां उन्होंने 150 किलो वजन उठाया था।
प्रीतिस्मिता भोई का यह प्रदर्शन भारत के लिए गर्व का क्षण है। उनकी मेहनत और संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, जुनून और समर्पण से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।