रायपुर। बारिश का मौसम गुजर चुका है, लेकिन उसकी मार झेल रही शहर की सड़कें आज भी खतरनाक गड्ढों से भरी हुई हैं। हालात यह हैं कि रोज़ाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं और कई बार उनकी जान भी चली जाती है। ताज़ा घटना आमापारा चौक स्वीपर कॉलोनी के पास हुई, जहां जिला सहकारी बैंक के सेवानिवृत्त मैनेजर लक्ष्मीकांत तिवारी की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वह बैंक से रिटायरमेंट की औपचारिकताएं पूरी कर लौट रहे थे।
कैसे हुआ हादसा
सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि लक्ष्मीकांत तिवारी अपनी एक्टिवा से गुजर रहे थे। अचानक सड़क पर बने गहरे गड्ढे से उनकी गाड़ी उछली और संतुलन बिगड़ गया। वह सड़क पर गिर पड़े और तभी सामने से तेज़ रफ्तार आ रही वेगनआर कार उनके सिर को रौंदते हुए निकल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
बार-बार हादसे वाली सड़क
भाठागांव से काठाडीह जाने वाला मार्ग इस समय पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
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सड़क के बीचोबीच बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं।
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किनारों पर नाली निर्माण अधूरा पड़ा है।
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कई जगह पाइपलाइन फट जाने से पानी सड़कों पर फैलता है और कीचड़ बन जाती है।
इस वजह से रोज़ाना लोग फिसलकर गिरते हैं और आए दिन एक्सीडेंट होते हैं। निगम प्रशासन इस मार्ग का चौड़ीकरण करने की योजना तो बना चुका है, लेकिन फिलहाल मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं किया गया है।
अक्टूबर से होना था काम, लेकिन…
बारिश रुकने के बाद अक्टूबर में सड़क मरम्मत और नई सड़कें बनाने का कार्य शुरू होना था। लेकिन अब तक काम की शुरुआत नहीं हुई है। नतीजा यह है कि पहले से टूटी-फूटी सड़कें और बदतर हो गई हैं। जगह-जगह जाम की स्थिति भी बनी रहती है।
शहर के 10 बड़े मार्ग, जहां गड्ढों का साम्राज्य
रायपुर के ज्यादातर व्यस्ततम मार्गों पर भी यही हाल है। जहां दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है, वहीं सड़क पर गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। कई जगह तो हालत ऐसी है कि पूरी सड़क को नए सिरे से बनाना ही पड़ेगा।
इन खस्ताहाल सड़कों की सूची इस प्रकार है –
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लाखेनगर से आमापारा
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आमापारा से समता कॉलोनी
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स्टेशन रोड से तेलघानी नाका
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पुरानी बस्ती से मठपारा
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भाठागांव से काठाडीह
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रायपुरा सर्विस रोड से चंगोराभाठा
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पुलिस लाइन से बैरनबाजार
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बैरनबाजार से होलीक्रास स्कूल
सवालों के घेरे में नगर निगम
शहरवासियों का कहना है कि निगम प्रशासन की लापरवाही से सड़कें मौत का जाल बन चुकी हैं। जहां लाखों लोग रोज़ सफर करते हैं, वहां गड्ढों और कीचड़ के बीच चलना जान जोखिम में डालने जैसा है।