रायपुर। बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत नहीं मिल पाई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत ने सोमवार को उनकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि उनकी रिहाई से चल रही जांच पर असर पड़ सकता है, इसलिए उन्हें जेल में ही रहना होगा।
चैतन्य बघेल फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और अब तक 101 दिन से हिरासत में हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक असफल कोशिश
इससे पहले चैतन्य बघेल ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। 17 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को वैध बताया था। इसके बाद ही उन्होंने विशेष अदालत में जमानत अर्जी लगाई थी।
ED का आरोप: 16.70 करोड़ पहुंचे चैतन्य तक
ED के अनुसार, शराब घोटाले से निकलने वाले पैसों का बड़ा हिस्सा चैतन्य बघेल तक पहुंचा।
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आरोप है कि उन्हें 16.70 करोड़ रुपये ब्लैक मनी के रूप में मिले।
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यह रकम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर सफेद दिखाई गई।
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जांच एजेंसी का कहना है कि चैतन्य ने फर्जी निवेश और नकली लेन-देन दिखाकर मनी लॉन्ड्रिंग की।
जन्मदिन पर गिरफ्तारी
18 जुलाई को ED ने चैतन्य बघेल को भिलाई स्थित घर से गिरफ्तार किया था। खास बात यह रही कि यह कार्रवाई उनके जन्मदिन वाले दिन हुई। बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
‘विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट’ में घोटाले के पैसे का इस्तेमाल
ED की जांच में खुलासा हुआ कि चैतन्य बघेल की कंपनी बघेल डेवलपर्स के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट में घोटाले की रकम लगाई गई।
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वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था, जबकि दस्तावेजों में 7.14 करोड़ दिखाया गया।
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ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपये कैश दिया गया, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।
फर्जी फ्लैट खरीदी का खुलासा
ED ने पाया कि कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदे और इसके लिए 5 करोड़ रुपये बघेल डेवलपर्स को दिए।
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फ्लैट कर्मचारियों के नाम पर दर्ज हुए, लेकिन पैसे ढिल्लो ने चुकाए।
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यह सब एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर 2020 को हुआ।
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ED का दावा है कि यह पूरी प्लानिंग ब्लैक मनी को सफेद करने के लिए थी।
5 करोड़ कैश का ‘फर्जी ट्रांसफर’
ED ने यह भी बताया कि भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य की कंपनी को 5 करोड़ रुपये लोन दिया था। बाद में उसी ज्वेलर्स ने कंपनी से प्लॉट खरीद लिए, लेकिन कीमत बहुत कम (80 लाख) दर्ज की गई। एजेंसी का दावा है कि यह सब काले धन को कानूनी दिखाने के लिए किया गया।
फ्रंट कंपनियों के जरिए पैसों का नेटवर्क
ED के मुताबिक, पैसा सीधे चैतन्य तक न पहुंचे, इसके लिए कई कंपनियों और व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया।
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ढिल्लो सिटी मॉल → ढिल्लो ड्रिंक्स → कर्मचारियों के अकाउंट → बघेल डेवलपर्स।
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इस चैनलाइजिंग से चैतन्य तक लगभग 16.70 करोड़ रुपये पहुंचे।
गवाहों के बयान और मोबाइल चैट अहम सबूत
ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में बताया कि –
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पप्पू बंसल के बयान और मोबाइल चैट से चैतन्य की भूमिका सामने आई।
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पैसा सिंडिकेट से होते हुए अनवर ढेबर → दीपेंद्र चावड़ा → केके श्रीवास्तव → कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल → चैतन्य बघेल तक पहुंचता था।
बचाव पक्ष की दलील
चैतन्य के वकील फैजल रिज़वी ने कहा –
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गिरफ्तारी सिर्फ पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है, जो खुद आरोपी हैं।
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2022 से चल रही जांच में चैतन्य को कभी समन नहीं भेजा गया।
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उन्होंने जांच में सहयोग किया, सारे दस्तावेज सौंपे, फिर भी अचानक गिरफ्तार किया गया।
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असल “गुनाह” यह है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।
छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला – एक नजर में
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ED ने ACB की FIR के आधार पर केस दर्ज किया।
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घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई।
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इसमें IAS अनिल टुटेजा, आबकारी MD एपी त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
तीन तरीके से घोटाला हुआ:
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डिस्टलरी से कमीशन वसूली – प्रति पेटी 75-100 रुपये।
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नकली होलोग्राम वाली शराब बेचना – 15 जिलों में अवैध सप्लाई।
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सप्लाई एरिया बदलकर वसूली – सिर्फ 3 साल में 52 करोड़ रुपये उगाहे।
यानी, कोर्ट ने साफ कहा कि चैतन्य बघेल की जमानत से जांच पर असर पड़ेगा, इसलिए उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा।