चक्रवात मोन्था अब कमजोर पड़ चुका है और पश्चिम की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसका असर अभी भी छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने सरगुजा संभाग के जिलों में हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।
कोंडागांव में पुल धंसा
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कोंडागांव जिले के ग्राम आदनार में लगातार बारिश से ‘बड़को नाला पुलिया’ टूट गई।
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यह पुल लिंगोंपथ–मर्दापाल–भाटपाल–नारायणपुर मार्ग को जोड़ता था और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बना था।
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पुल का एक हिस्सा धंसने के बाद पानी का दबाव बढ़ा और शेष हिस्सा भी टूट गया।
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गनीमत रही कि उस वक्त कोई वाहन पुल पार नहीं कर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
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अब ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
ट्रेनों पर असर
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बस्तर से चलने वाली 2 यात्री ट्रेनें रद्द कर दी गईं, जबकि 2 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया।
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ओडिशा और आंध्र प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेनों पर भी असर पड़ा।
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केके रेल लाइन पर चिमड़पल्ली के पास लैंडस्लाइड से ट्रैक पर चट्टानें और मिट्टी जमा हो गईं।
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नतीजतन, यात्री ट्रेनों को रोका गया, हालांकि मालगाड़ियां अभी भी चलाई जा रही हैं।
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यात्रियों की मदद के लिए वाल्टेयर रेल मंडल ने जगदलपुर समेत कई स्टेशनों पर हेल्पडेस्क बनाए और हेल्पलाइन नंबर 08912884714, 08912884715 जारी किए।
किसानों को नुकसान
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अचानक हुई बारिश ने बस्तर और आसपास के जिलों में किसानों की धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया।
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कई जगह खड़ी फसल गिर गई, वहीं कटाई के बाद खेतों में रखी धान की बोरियां और ढेर भीगकर खराब होने लगे हैं।
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कृषि मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कटे हुए धान को सुरक्षित जगह पर भंडारित करें और खड़ी फसल को बचाने के लिए तत्काल व्यवस्था करें।
मौसम का हाल और अलर्ट
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रायपुर समेत कई जिलों में सुबह से तेज हवाएं चलीं।
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मौसम विभाग ने आज भी 8 जिलों—कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर और जीपीएम में यलो अलर्ट जारी किया है।
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इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है।
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अगले 24 घंटे में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना है और 31 अक्टूबर के बाद मौसम साफ हो सकता है।
अक्टूबर में 59% ज्यादा बारिश
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सामान्य तौर पर अक्टूबर में औसत वर्षा 56.2 मिमी होती है।
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लेकिन इस साल 1 से 26 अक्टूबर के बीच 89.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
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यानी अब तक अक्टूबर में औसत से करीब 59% ज्यादा बारिश हो चुकी है।
कुल मिलाकर, मोन्था का असर अब कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन बारिश, तेज हवाओं और ट्रेनों की रद्दीकरण ने लोगों और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।