क्या चेक बाउंस होने से खराब होता है आपका CIBIL स्कोर? जानिए वजहें और समाधान

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चेक बाउंस होना अक्सर शर्मिंदगी और आर्थिक परेशानी का कारण बन जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब खाते में पैसा कम हो या चेक में कोई तकनीकी गलती हो जाती है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह आता है—क्या चेक बाउंस होने से CIBIL स्कोर खराब होता है?

CIBIL स्कोर लोन, क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग सिस्टम में आपकी विश्वसनीयता तय करता है। अगर ये स्कोर खराब हो जाए, तो न केवल लोन मिलने में दिक्कत आती है बल्कि ज्यादा ब्याज दर भी चुकानी पड़ती है।


CIBIL स्कोर क्या होता है और क्यों जरूरी है?

  • CIBIL स्कोर तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच होता है।

  • यह दिखाता है कि आप कितना जिम्मेदारी से लोन या क्रेडिट चुकाते हैं।

  • अगर आपका स्कोर 750+ है, तो बैंक आसानी से लोन देते हैं।

  • 650 से कम स्कोर होने पर लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।


चेक बाउंस क्या है?

जब बैंक किसी चेक का भुगतान नहीं करता और वह “Dishonoured” हो जाता है, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है।


⚠️ चेक बाउंस होने के 8 आम कारण

  1. खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना

  2. चेक पर गलत तारीख (पोस्ट-डेटेड या एक्सपायर्ड चेक)

  3. हस्ताक्षर mismatch होना

  4. चेक पर ओवरराइटिंग या कटिंग

  5. चेक का फटा या गंदा होना

  6. गलत राशि (शब्द और अंक में फर्क)

  7. बैंक द्वारा खाते पर रोक (Hold)

  8. तकनीकी त्रुटि (सिस्टम फेलियर या प्रिंटिंग एरर)


क्या चेक बाउंस सीधे CIBIL स्कोर को प्रभावित करता है?

सीधे नहीं।
चेक बाउंस की जानकारी बैंक सीधे CIBIL या किसी भी क्रेडिट ब्यूरो को नहीं भेजते।

लेकिन अगर चेक बाउंस की वजह से आपकी EMI, लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान लेट हो जाता है, तब CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है।


बार-बार चेक बाउंस होने पर क्या होता है?

  • EMI लेट होगी = CIBIL स्कोर गिर सकता है।

  • क्रेडिट कार्ड पेमेंट मिस होगी = स्कोर पर नेगेटिव असर।

  • 1-2 बार गलती से हुआ = ज्यादा प्रभाव नहीं, स्कोर 700+ रह सकता है।

  • बार-बार हुआ = भविष्य में लोन मिलने में कठिनाई और बैंक Penalty लगा सकते हैं।


चेक बाउंस से बचने के 6 आसान उपाय

✔ खाते में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें
✔ चेक लिखते समय तारीख, शब्द और अंकों पर ध्यान दें
✔ आपका सिग्नेचर बैंक रिकॉर्ड से मेल खाता हो
✔ पोस्ट-डेटेड या पुराने चेक से बचें
✔ ओवरड्राफ्ट लिमिट का ध्यान रखें
✔ चेक साफ और बिना कटिंग/ओवरराइटिंग के हो


अगर चेक बाउंस हो जाए तो क्या करें?

  • तुरंत प्राप्तकर्ता (payee) और बैंक से संपर्क करें

  • नया चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर या नकद भुगतान करके बकाया राशि साफ करें

  • EMI या क्रेडिट कार्ड पेमेंट लेट न होने दें

  • ऐसा करने से CIBIL स्कोर पर असर नहीं पड़ेगा


अगर CIBIL स्कोर गिर गया हो तो कैसे सुधारें? (10 जरूरी टिप्स)

  1. समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल भरें

  2. क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लिमिट के 30% से कम रखें

  3. नए लोन की बार-बार enquiry न करें

  4. पुराने लोन का समय पर समापन करें

  5. ऑटो-डेबिट सेट करें ताकि EMI लेट न हो

  6. क्रेडिट रिपोर्ट को नियमित रूप से जांचें

  7. गलत जानकारी हो तो CIBIL में सुधार की रिक्वेस्ट डालें

  8. किसी दूसरे के लिए गारंटर बनने में सावधानी रखें

  9. सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड (FD पर) से स्कोर सुधारें

  10. लम्बे समय तक अच्छे वित्तीय व्यवहार को बनाए रखें


निष्कर्ष

  • चेक बाउंस सीधे CIBIL स्कोर को प्रभावित नहीं करता।

  • लेकिन EMI या कार्ड पेमेंट लेट हुई तो अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान हो सकता है।

  • इसलिए चेक जारी करने से पहले बैलेंस, तारीख और सिग्नेचर की जांच करना हमेशा जरूरी है।

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