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त्योहारों ने दी राहत, लोन सस्ता हुआ लेकिन आगे ब्याज दरें फिर बढ़ सकती हैं – CMIE रिपोर्ट

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त्योहारी सीजन का आर्थिक असर अब बैंकिंग सेक्टर में भी साफ दिखाई देने लगा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में लोन की औसत ब्याज दर 0.24% घट गई। यह कमी उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है, क्योंकि इस दौरान बैंकों ने त्योहारी ऑफर्स के जरिए कर्ज को सस्ता किया और आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई कटौती का असर भी बाजार तक पहुंचा।

लोन सस्ता कैसे हुआ?

  • फरवरी 2025 से अब तक रेपो दरों में लगभग 1% की कटौती की गई।

  • इसके असर से फरवरी से सितंबर के बीच कर्ज की ब्याज दरों में कुल 0.83% की गिरावट दर्ज की गई।

  • सितंबर में ही औसत लोन ब्याज दर 8.74% से घटकर 8.50% पर आ गई। यह अगस्त के मुकाबले 0.24% कम है।

  • उदाहरण के तौर पर, बैंक ऑफ बड़ौदा ने खुदरा लोन दरों में 0.25% से 0.70% तक की कटौती की थी।

  • एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई व एक्सिस बैंक ने भी होम, कार और पर्सनल लोन पर विशेष ऑफर्स लॉन्च किए।

कौन से बैंकों ने सबसे ज्यादा राहत दी?

बैंक का प्रकार सितंबर में ब्याज दर में बदलाव
सरकारी बैंक औसतन 0.25% की कमी
निजी बैंक औसतन 0.10% की कमी
समूचे बैंकों का नया औसत 8.5% वार्षिक ब्याज दर

जनवरी में यह दर 9.3% थी, यानी अब तक कुल 0.83% की गिरावट आ चुकी है।

जमा (FD/सावधि खाता) पर क्या प्रभाव?

  • बैंकों ने फरवरी से सितंबर के बीच जमा पर ब्याज दरों में 1.02% की कटौती कर दी।

  • अगस्त में जमा पर ब्याज दरें कई साल के न्यूनतम स्तर 5.56% तक पहुंच गई थीं।

  • सितंबर में इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई और यह 5.60% पर लौट आई।

क्यों घटा बैंकिंग सिस्टम का नकद भंडार (Liquidity)?

  • कर्ज की मांग बढ़ने के कारण बैंकों के पास रखी नकदी में जोरदार गिरावट आई।

  • अगस्त में सिस्टम में औसत नकदी 2.9 लाख करोड़ रुपये थी।

  • सितंबर में यह घटकर 1.6 लाख करोड़ और अक्टूबर में 1 लाख करोड़ से भी नीचे चली गई।

  • जबकि आरबीआई ने इस दौरान तरलता बढ़ाने के लिए सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) में दो बार कटौती भी की थी।

⚠️ आगे क्या हो सकता है?

CMIE के अनुसार, दिसंबर तिमाही में ब्याज दरें फिर से बढ़ सकती हैं। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:

  1. त्योहारी सीजन के बाद ऋण मांग में कमी नहीं होगी, बल्कि बनी रहेगी।

  2. बैंक जमा राशि जुटाने में धीमे पड़ रहे हैं, जिससे उनके पास लोन देने के लिए पूंजी की कमी हो सकती है।

  3. आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया संभालने के लिए दखल दे रहा है। अगर यह बढ़ा, तो बैंकिंग तरलता और घट सकती है।

रेपो रेट और ब्याज दर में बदलाव का संक्षिप्त सफर

महीना रेपो रेट में बदलाव लोन ब्याज दर में बदलाव
फरवरी 2025 -0.25% गिरावट शुरू
जून 2025 -0.50% अतिरिक्त कुल 0.58% गिरावट
जुलाई 2025 सरकारी बैंकों ने 0.19% बढ़ाई
अगस्त 2025 फिर से कमी शुरू दरें फिर घटीं
सितंबर 2025 त्योहारों का असर औसत ब्याज दर 0.24% घटी

निष्कर्ष:
त्योहारी सीजन ने जनता को थोड़ी आर्थिक राहत जरूर दी है। लोन सस्ता हुआ, EMI का बोझ हल्का हुआ और बाजार में खरीदारी तेज हुई। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। दिसंबर तिमाही में ब्याज दरें फिर बढ़ सकती हैं। ऐसे में अगर आप लोन लेने की सोच रहे हैं, तो मौजूदा समय सबसे बेहतर माना जा सकता है।

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