कर्ज में डूबी एडटेक कंपनी बायजूस के फाउंडर बायजू रवींद्रन पर अमेरिकी डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट ने करारा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें 1 बिलियन डॉलर (लगभग 9,000 करोड़ रुपए) से अधिक की रकम चुकाने का आदेश दिया है। यह फैसला बायजूस की अमेरिकी सहायक कंपनी Byju’s Alpha और अमेरिकी लोनदाता Glass Trust LLC की याचिका पर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
2021 में बायजूस ने अमेरिकी बैंकों और लेंडर्स से करीब 1.2 बिलियन डॉलर (₹11,000 करोड़) का कर्ज लिया था, जो कंपनी के संचालन और विस्तार में इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन भारी विस्तार, बड़े अधिग्रहण और वित्तीय कुप्रबंधन के चलते कंपनी समय पर कर्ज नहीं चुका सकी और डिफॉल्ट कर गई।
इसके बाद अप्रैल 2024 में बायजूस अल्फा ने खुद बायजूस के फाउंडर बायजू रवींद्रन, उनकी पत्नी दिव्या गोकुलनाथ, भाई रिजू रवींद्रन और अन्य पर 533 मिलियन डॉलर (₹4,500 करोड़) की धोखाधड़ी और पैसे की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए केस दायर किया।
नवंबर 2025 में डेलावेयर कोर्ट ने डिफॉल्ट जजमेंट सुनाते हुए रवींद्रन को 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की अदायगी का आदेश दिया है।
बायजूस की चढ़ान से ढलान तक की कहानी
तेजी की तरफ़—2011 से 2021 तक
2011 में एक छोटे ऑनलाइन लर्निंग प्लैटफॉर्म के रूप में शुरू हुआ बायजूस, 2015 में ऐप लॉन्च के बाद तेज़ी से बढ़ा। इंटरैक्टिव कंटेंट, आसान भाषा और बच्चों के लिए आकर्षक लर्निंग मॉडल इसकी ताकत बनी।
कोविड महामारी ने इसकी ग्रोथ को आसमान तक पहुंचा दिया—एडटेक की डिमांड बढ़ी और बायजूस ने व्हाइटहैट जूनियर, आकाश समेत कई बड़े अधिग्रहण किए।
2022 तक कंपनी की वैल्यूएशन 22 बिलियन डॉलर पहुंच गई—यह भारत का सबसे बड़ा स्टार्टअप बन चुका था।
गिरावट की शुरुआत—2022 के बाद
लेकिन आक्रामक विस्तार और कर्ज ने कंपनी की नींव कमजोर करनी शुरू कर दी।
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फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में देरी
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2021–22 में ₹8,245 करोड़ का भारी घाटा
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निवेशकों के सवाल
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आक्रामक सेल्स टैक्टिक्स की शिकायतें
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रिफंड न मिलने पर ग्राहकों की नाराज़गी
इन सबने बायजूस की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचाया।
2023: हालात नियंत्रण से बाहर
E.D. ने FEMA उल्लंघन की जांच शुरू की।
बोर्ड मेंबर्स और डेलॉइट ऑडिटर ने इस्तीफा दिया।
अमेरिकी कर्जदाता दिवालियापन की मांग लेकर कोर्ट पहुंचे।
कर्मचारियों की छंटनी बढ़ती गई।
2024: बायजूस का पतन
कंपनी की वैल्यूएशन लगभग शून्य हो गई।
कानूनी विवाद, बढ़ते कर्ज और संचालन में अस्थिरता के चलते कंपनी अब दिवालियेपन की प्रक्रिया में है।