छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सोंढुर में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास होने वाला है। यहां भगवान भोलेबाबा की 40 फीट ऊँची भव्य प्रतिमा का निर्माण अंतिम चरणों में है। प्रतिमा का आकार, शिल्पकारी और संपूर्ण संरचना क्षेत्र की धार्मिक भावना और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभर रही है। कारीगरों, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह भव्य प्रतिमा सोंढुर को एक नई आध्यात्मिक पहचान देने जा रही है।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस विराट प्रतिमा की विधि-विधानपूर्वक प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस आयोजन को भव्य और दिव्य बनाने की जिम्मेदारी महेश फाउंडेशन, सांकरा ने संभाली है। फाउंडेशन ग्रामीणों के साथ मिलकर इस क्षेत्रीय आस्था स्थल को एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने में जुटा हुआ है।
फाउंडेशन के संस्थापक हितेश महेश सिन्हा ने बताया कि इस ऐतिहासिक दिन को समाजसेवी रूप में यादगार बनाने के लिए एक सामूहिक विवाह समारोह भी आयोजित किया गया है, जिसमें 21 जोड़ों का विवाह निःशुल्क कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि खासतौर पर उन बेटियों को चुना गया है, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं और संसाधनों की कमी के कारण उनके विवाह में अड़चनें आ रही थीं। हितेश का मानना है कि महाशिवरात्रि जैसे शुभ दिन पर बेटियों का विवाह संपन्न कराना ईश्वर की सेवा के समान है। उनके अनुसार किसी भी बेटी का विवाह आर्थिक तंगी के कारण रुकना नहीं चाहिए।
सामूहिक विवाह स्थल भोलेबाबा की विशाल प्रतिमा के समीप ही तैयार किया जा रहा है, ताकि नवविवाहित जोड़े भगवान शिव के आशीर्वाद से अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें। पूरे कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान, सामूहिक पूजन, बारात स्वागत, भंडारा और विवाह के लिए आवश्यक सभी सामग्री का प्रबंध निःशुल्क किया जा रहा है। आयोजन में स्थानीय समुदाय भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहा है।
सोंढुर में होने वाले इस आयोजन को लोग आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं। क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग महाशिवरात्रि के दिन इस अद्वितीय समारोह के साक्षी बनने की तैयारी कर रहे हैं। 40 फीट ऊँची भोलेबाबा की प्रतिमा और 21 बेटियों के विवाह का यह संगठित स्वरूप निश्चित रूप से सोंढुर को एक प्रेरणादायक और सामाजिक एकता का केंद्र बना देगा।