बाजार में शहद की मांग बढ़ते ही मिलावट का खेल भी तेज हो गया है। दिखने में बिल्कुल असली जैसा, लेकिन अंदर भरा होता है शुगर सिरप, कॉर्न सिरप या अन्य केमिकल—जो शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान कर सकते हैं। खासकर वे लोग जो रोज सुबह गुनगुने पानी या ग्रीन टी में शहद मिलाते हैं, उनके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वे जो खा रहे हैं वह शुद्ध है या नहीं।
शहद सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उसकी मेडिसिनल वैल्यू के लिए भी जाना जाता है। लेकिन वही शहद अगर नकली या मिलावटी हो, तो शरीर में शुगर लेवल बढ़ाने के साथ-साथ कई हानिकारक तत्व भी पहुंचा सकता है। इसलिए कुछ आसान घरेलू तरीकों से आप मिनटों में असली और नकली शहद की पहचान कर सकते हैं।
सबसे पहले पानी टेस्ट कर सकते हैं। एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद डालें। असली शहद भारी होता है और नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली शहद जल्दी घुलकर पानी में फैल जाता है। असली शहद की गाढ़ापन उसे तुरंत मिश्रित नहीं होने देता।
इसके बाद फायर टेस्ट एक प्रभावी तरीका है। कॉटन की बाती पर थोड़ा शहद लगाकर जलाने की कोशिश करें। शुद्ध शहद में पानी नहीं होता, इसलिए वह आग पकड़ लेता है। नकली शहद में मिलावट और सिरप होने के कारण वह आसानी से नहीं जलता। हालांकि यह टेस्ट करते समय सावधानी जरूरी है।
सिरका टेस्ट भी शहद की असलियत बताता है। एक चम्मच शहद में कुछ बूंद सिरका मिलाएं। अगर झाग बनने लगे तो समझ लें कि शहद में मिलावट है। असली शहद सिरके के साथ किसी भी रिएक्शन में नहीं आता।
थोड़ा शहद अंगूठे पर डालकर भी टेस्ट किया जा सकता है। वास्तविक शहद गाढ़ा होता है और वहीं ठहरा रहता है, धीरे-धीरे बहेगा। जबकि नकली शहद पतला होता है, तुरंत फैल जाता है।
अंत में क्रिस्टलाइजेशन टेस्ट बेहद भरोसेमंद है। असली शहद समय के साथ जमने लगता है या क्रिस्टल बनाता है। नकली शहद लंबे समय तक स्मूद और बिल्कुल एक जैसा बना रहता है, क्योंकि उसमें प्राकृतिक एंज़ाइम और तत्व नहीं होते।
इन सिंपल तरीकों से आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि जो शहद आपकी रसोई में है, वह कितना शुद्ध है। और एक बार असली शहद की पहचान हो जाए, तो सेहत भी सुरक्षित रहती है और स्वाद भी।