“बजट से पहले बदल जाएगा कस्टम सिस्टम: नियम सरल, ड्यूटी कम—सरकार का बड़ा रिफॉर्म ट्रेड और इकोनॉमी को देगा नया बूस्ट”

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ संकेत दे दिया है कि बजट से ठीक पहले देश के कस्टम सिस्टम में एक व्यापक बदलाव होने जा रहा है—ऐसा बदलाव जो आने वाले वर्षों में ट्रेड, बिजनेस और विदेशी निवेश के माहौल को पूरी तरह नया रूप देगा। कस्टम्स वह व्यवस्था है जो इंपोर्ट–एक्सपोर्ट के हर सामान को रेगुलेट करती है, टैरिफ वसूलती है और देश की सीमाओं से गुजरने वाले कार्गो पर नज़र रखती है। लेकिन सालों से यह सिस्टम व्यापारियों के लिए जटिल, समय लेने वाला और अक्सर बोझिल माना जाता रहा है। अब सरकार इसी ढांचे को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की तैयारी में है।

सीतारमण ने कहा कि कस्टम्स में अभी भी कई प्रक्रियाएं इतनी जटिल हैं कि छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक, हर किसी को कंप्लायंस में दिक्कतें आती हैं। नियमों की संख्या ज्यादा, प्रक्रियाएं लंबी और अधिकारियों के साथ डायरेक्ट इंटरैक्शन कई बार विवाद पैदा करते हैं। यही वजह है कि सरकार अब इस पूरी मशीनरी को हल्का, तेज और डिजिटल बनाना चाहती है—कुछ उसी तरह जैसे इंकम टैक्स में फेसलेस असेसमेंट्स ने पूरे सिस्टम को बदल दिया था।

बीते दो सालों में सरकार कई उत्पादों पर ड्यूटी रेट्स को लगातार कम करती रही है। लेकिन अभी भी कुछ सेगमेंट ऐसे हैं जहां टैरिफ ऑप्टिमल से ऊपर हैं। बजट से पहले इन क्षेत्रों पर भी फोकस किया जाएगा ताकि इंपोर्टेड गुड्स पर अनावश्यक बोझ न पड़े और कंज्यूमर को भी कीमतों में राहत मिल सके। सरकार ने साफ किया है कि कस्टम्स को विश्व कस्टम संगठन (WCO) के स्टैंडर्ड्स के अनुरूप बनाना अब अगला बड़ा कदम है।

वित्त मंत्री का कहना है कि समस्या टैक्स रेट्स में नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में है—इसी तरह का संकट इंकम टैक्स सिस्टम में भी था, जहां “टैक्स टेररिज्म” जैसी शब्दावली बन गई थी। जैसे फेसलेस सिस्टम ने उसे बदल दिया, उसी तर्ज पर कस्टम रिफॉर्म्स तैयार किए जा रहे हैं। वे कहती हैं कि लक्ष्य यह है कि लोग कस्टम्स को थकाऊ, बोझिल या डराने वाला न समझें। स्कैनिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि कार्गो और अधिकारियों के बीच डायरेक्ट संपर्क कम हो और डिस्क्रेशन खत्म हो।

इस बदलाव का असर सिर्फ प्रशासन तक नहीं रहेगा—ट्रेड और इकोनॉमी पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। तेज प्रोसेसिंग से समय बचेगा, कंसाइनमेंट्स जल्दी क्लियर होंगे, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी और छोटे–मझोले व्यापारियों के लिए कंप्लायंस आसान हो जाएगा। ड्यूटी कट्स से कई इंपोर्टेड सामान की कीमतें भी कम हो सकती हैं, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी। विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए भी यह संदेश जाएगा कि भारत व्यापार करने के लिए पहले से ज्यादा तेज़, साफ और भरोसेमंद जगह बन रहा है।

हालाँकि चुनौती दोहरी है—नियम सरल भी बनाने हैं और अवैध व संवेदनशील सामानों का नियंत्रण भी बनाए रखना है। इसलिए सुरक्षा तंत्र को हाई-टेक स्कैनिंग और ऑटोमेशन से मजबूत किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि यह पूरा “क्लीनिंग अप असाइनमेंट” बजट से पहले पूरा किया जाएगा, ताकि इकोनॉमी की ग्रोथ रेट मजबूत गति से आगे बढ़ सके।

कस्टम्स ड्यूटी आखिर है क्या? यह वही टैक्स है जो किसी भी विदेशी सामान के भारत की सीमा में प्रवेश करते ही लगाया जाता है। इसका उद्देश्य रेवेन्यू जुटाना और घरेलू उद्योग को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है। बेसिक रेट भले 10% हो, लेकिन कई आइटम्स पर यह काफी ज्यादा है। आने वाले रिफॉर्म्स से उम्मीद है कि ऐसे मामलों में दरें ऑप्टिमल स्तर पर लाई जाएंगी और पूरा ढांचा ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप हो जाएगा।

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