रायपुर में घर के बाहर खड़ी गाड़ी से अगर सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी दूसरे राज्य के टोल प्लाजा पर टैक्स कट जाए, तो यह किसी के लिए भी चौंकाने वाला अनुभव होगा। ऐसी ही हैरान करने वाली घटना नवा रायपुर इलाके के एक किसान के साथ सामने आई है, जिसने एक बार फिर फास्टैग सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवा रायपुर चेरिया के पूर्व सरपंच बल्ला तिवारी की कार पूरी तरह सुरक्षित उनके घर की पार्किंग में खड़ी थी, इसी बीच सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि बिहार के बेगूसराय स्थित गोविंदपुर टोल प्लाजा पर उनकी गाड़ी से 60 रुपये का टोल टैक्स कट गया है।
मैसेज देखते ही पहले तो उन्हें लगा कि उनकी कार चोरी हो गई है। घबराकर वे तुरंत घर के बाहर पहुंचे और देखा कि गाड़ी वहीं खड़ी थी, जहां उन्होंने रात में पार्क की थी। यह देखकर उनकी चिंता और बढ़ गई कि जब गाड़ी कहीं गई ही नहीं, तो टोल कैसे कट गया। उनकी कार का फास्टैग HDFC बैंक से जुड़ा हुआ है। पैसे कटने के बाद किसी अनहोनी की आशंका से वे बैंक पहुंचे, जहां बैंक प्रबंधन ने उनके अकाउंट से 60 रुपये की कटौती की पुष्टि तो कर दी, लेकिन यह नहीं बता पाए कि रायपुर में खड़ी कार से बिहार के टोल पर पैसा आखिर कैसे कट गया।
जानकारों के मुताबिक इस तरह की गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह टोल प्लाजा पर लगे नंबर प्लेट रीडिंग कैमरों में तकनीकी खामी बताई जा रही है। कई बार कैमरे गाड़ियों का नंबर सही से रीड नहीं कर पाते, ऐसे में वहां तैनात कर्मचारी मैन्युअल रूप से गाड़ी का नंबर दर्ज करते हैं। इसी दौरान एक छोटी सी गलती किसी दूसरे वाहन के फास्टैग वॉलेट से पैसा काट देती है। यानी सड़क पर कोई और गाड़ी गुजरती है और भुगतान किसी बेगुनाह वाहन मालिक के खाते से हो जाता है।
इस तरह की शिकायतें सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं हैं। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि कई बार अफसरों तक के मोबाइल पर भी गलत टोल कटने के मैसेज आ चुके हैं। बहुत से लोग छोटी रकम समझकर शिकायत तक दर्ज नहीं कराते, लेकिन इस तरह की लगातार हो रही फर्जी कटौतियों से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। तकनीकी खामियों के नाम पर कई शिकायतें आगे बढ़ने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
अगर किसी वाहन मालिक के फास्टैग से गलत तरीके से पैसा कट जाता है, तो इसके लिए NHAI की हेल्पलाइन 1033 पर तुरंत शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा false deduction से जुड़ी शिकायत ईमेल के जरिए भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन आईडी, गाड़ी का नंबर, कटौती की तारीख, समय और अमाउंट जैसी पूरी जानकारी देना जरूरी होता है। शिकायत दर्ज होने के बाद वाहन मालिक को एक रेफरेंस नंबर मिलता है, जिसके जरिए वह अपनी शिकायत का स्टेटस ट्रैक कर सकता है और रिफंड की प्रक्रिया पर नजर रख सकता है।
रायपुर के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा के साथ-साथ सिस्टम की सटीकता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है, वरना ऐसी तकनीकी गड़बड़ियां आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी रहेंगी।