सर्दियों का मौसम जहां कई लोगों के लिए चाय, कॉफी और गर्म रजाइयों की राहत लेकर आता है, वहीं गठिया के मरीजों के लिए यही मौसम सबसे ज्यादा तकलीफदेह साबित होता है। जैसे ही तापमान गिरता है, जोड़ों में ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ने लगता है। इसका सीधा असर सूजन, अकड़न और तेज दर्द के रूप में देखने को मिलता है। खासकर बुजुर्गों और पुराने गठिया मरीजों के लिए यह समय और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि उठना-बैठना, चलना-फिरना और रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी भारी लगने लगते हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ घरेलू उपाय और सही जीवनशैली अपनाकर सर्दियों में बढ़ने वाले इस दर्द को काफी हद तक काबू में रखा जा सकता है। ये उपाय पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और शरीर पर किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचाते। बस जरूरत होती है थोड़ी सावधानी, सही खान-पान और शरीर को पर्याप्त गर्माहट देने की। नियमित रूप से ये छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं तो जोड़ों की तकलीफ में काफी आराम महसूस किया जा सकता है।
गठिया के दर्द में सबसे त्वरित राहत देने वाला तरीका गर्म सेक माना जाता है। जब जोड़ों पर गर्माहट पहुंचती है तो वहां की जकड़न धीरे-धीरे खुलने लगती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाता है। माइक्रोवेव से गर्म किया हुआ हीट पैड, गर्म पानी की बोतल या हल्का गर्म कपड़ा जोड़ों पर लगाने से दर्द और सूजन में अच्छा आराम मिलता है। दिन में दो से तीन बार करीब दस से पंद्रह मिनट तक गर्म सेक देने से असर जल्दी दिखाई देता है।
हल्दी वाला दूध भी सर्दियों में गठिया के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन शरीर की सूजन को कम करने में मदद करता है। रात को सोने से पहले गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से अंदरूनी सूजन कम होती है, जिससे जोड़ों का दर्द और अकड़न धीरे-धीरे घटने लगती है। यह उपाय लंबे समय तक अपनाने पर ज्यादा असरदार साबित होता है।
सर्दियों में तेल से मालिश भी गठिया मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरसों, तिल या नारियल तेल को हल्का गर्म करके जोड़ों पर रोज मालिश करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और खून का प्रवाह बेहतर होता है। इससे न केवल दर्द कम होता है, बल्कि जोड़ों की पकड़ भी धीरे-धीरे सुधरने लगती है। ठंड के मौसम में रोजाना दस से पंद्रह मिनट की मालिश बेहद फायदेमंद मानी जाती है।
अक्सर सर्दियों में लोग चलना-फिरना कम कर देते हैं, जिससे जोड़ों में अकड़न और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग बेहद जरूरी हो जाती है। सुबह या शाम हल्की वॉकिंग, आसान योगासन, स्ट्रेचिंग और जोड़ों को धीरे-धीरे घुमाने से उनकी मूवमेंट बनी रहती है और जकड़न कम होती है। नियमित हलचल से दर्द में भी धीरे-धीरे कमी आने लगती है।
गठिया मरीजों के लिए सही डाइट भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार जोड़ों को मजबूती देता है और हड्डियों को कमजोर होने से बचाता है। दूध, दही, पनीर, अंडा, दालें, बादाम और हरी पत्तेदार सब्जियां आहार में जरूर शामिल करनी चाहिए। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है, जो जोड़ों के दर्द को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
कुल मिलाकर, सर्दियों में गठिया का दर्द जरूर बढ़ता है, लेकिन सही देखभाल, घरेलू उपायों और संतुलित जीवनशैली से इस दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर फिर भी दर्द बहुत ज्यादा बना रहे या सूजन लगातार बढ़ती जाए, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।