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मैरी कॉम ने बस्तर ओलंपिक में भरी ऊर्जा: बोलीं— ट्राइबल खिलाड़ी संभावनाओं के महासागर, अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाएंगे दम

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बस्तर ओलंपिक के भव्य शुभारंभ में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब प्रियदर्शिनी स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज और ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मैरी कॉम ने कदम रखा। उनके आते ही स्टेडियम का माहौल जोश, उत्साह और गर्व की भावना से भर उठा। मंच पर पहुंचकर मैरी कॉम ने खिलाड़ियों से मुलाकात की, उनके जोश की तारीफ की और प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन की शुभकामनाएं दीं।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ट्राइबल युवाओं को खेलों से जोड़ने की पहल वाकई सराहनीय है। उनकी राय में अगर किसी में हुनर और इच्छा हो, तो मंच चाहे गांव का हो या दुनिया का—खिलाड़ी अपनी छाप जरूर छोड़ते हैं। मैरी कॉम ने बताया कि वे भी बेहद साधारण परिवार से थीं, जहां सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन ज़िद, मेहनत और निरंतरता ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा भी उसी जुनून और क्षमता से भरे हैं। खेल उनके जीवन में अवसर और पहचान दोनों ला सकता है। जो खिलाड़ी आज बस्तर ओलंपिक में संघर्ष कर रहे हैं, कल वे देश का प्रतिनिधित्व करते हुए तिरंगा लहरा सकते हैं। उनकी प्रेरक कहानी स्वयं बताती है कि सही दिशा और मजबूत इरादे खिलाड़ी को कहीं भी ले जा सकते हैं।

मैरी कॉम ने बस्तर को ‘नया बस्तर’ कहकर संबोधित किया और कहा कि वे यहां हुए बदलाव को अपनी आंखों से देख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं और यह जानकर अच्छा लगा कि वे बस्तर और आदिवासी इलाकों के विकास को लेकर लगातार गंभीरता से काम कर रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि मौका मिलने पर वे भारत के नियाग्रा कहलाने वाले चित्रकोट जलप्रपात को जरूर देखने जाएंगी।

खेल के मैदान में मौजूद हज़ारों युवा खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए मैरी कॉम ने कहा कि आज का बस्तर ओलंपिक आने वाले कल के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को जन्म देगा। ट्राइबल युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास की जरूरत है। उनका मानना है कि बस्तर के कई खिलाड़ी भविष्य में ओलंपिक के मंच पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

मैरी कॉम की मौजूदगी और उनके प्रेरक शब्दों ने बस्तर ओलंपिक के शुभारंभ को सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि उम्मीदों का उत्सव बना दिया। उनकी यात्रा, उनका संघर्ष और उनकी सफलता उस हर युवा खिलाड़ी के लिए संदेश है जो बड़े सपने देखने का साहस करता है—कि मेहनत और विश्वास हो तो मंज़िल कहीं दूर नहीं।

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