IIT मद्रास ने तकनीकी शिक्षा में एक अहम और दूरगामी बदलाव करते हुए BTech छात्रों के लिए नया एग्जिट विकल्प पेश किया है। अब संस्थान में BTech कर रहे छात्र तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद BSc डिग्री लेकर कोर्स छोड़ सकेंगे। इसके लिए छात्रों को कुल 400 में से कम से कम 250 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की अवधारणा को मजबूती देती है।
संस्थान के अनुसार यह सुविधा 2024 बैच के छात्रों के लिए लागू होगी, जो वर्ष 2027 से इस विकल्प का उपयोग कर सकेंगे। IIT मद्रास इसी शैक्षणिक सत्र से सीनियर छात्रों के लिए भी इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि BSc डिग्री लेकर बाहर निकलने से पहले छात्रों को कम से कम एक बार BTech डिग्री पूरी करने का प्रयास करना अनिवार्य होगा।
IIT मद्रास के डीन प्रोफेसर प्रताप हरिदास ने इस फैसले को छात्रों के भविष्य के लिए उपयोगी बताते हुए कहा है कि संस्थान स्पेशलाइजेशन के साथ BSc डिग्री देने की भी योजना बना रहा है। प्रत्येक विभाग यह तय करेगा कि किसी विशेष स्पेशलाइजेशन के लिए कितने कोर क्रेडिट आवश्यक होंगे। उनके अनुसार यह BSc डिग्री छात्रों के लिए हायर एजुकेशन, MBA और सिविल सर्विस जैसी परीक्षाओं में बैठने का रास्ता आसान बनाएगी। साथ ही, जो छात्र इस विकल्प के तहत बाहर निकलेंगे, वे बाद में IIT मद्रास की ऑनलाइन BS डिग्री में भी प्रवेश ले सकेंगे।
डीन ने यह भी बताया कि कई छात्र ऐसे होते हैं जो विषय में रुचि न होने या किसी अन्य कारण से BTech डिग्री पूरी नहीं कर पाते। वहीं कुछ छात्र पढ़ाई के दौरान ही उद्यमिता की राह चुन लेते हैं और स्टार्टअप शुरू कर देते हैं। ऐसे छात्रों के लिए यह व्यवस्था बेहद फायदेमंद होगी, क्योंकि अब वे बिना डिग्री के बाहर निकलने के बजाय एक मान्य अकादमिक डिग्री हासिल कर सकेंगे।
IIT मद्रास इससे पहले भी छात्रों को अधिक लचीलापन देने के लिए कई सुधार लागू कर चुका है। शैक्षणिक दबाव कम करने के उद्देश्य से प्रति सेमेस्टर न्यूनतम आवश्यक क्रेडिट में करीब 10 प्रतिशत की कटौती की गई है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले, यानी उच्च CGPA वाले छात्रों को एक सेमेस्टर में ज्यादा क्रेडिट लेने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा BTech कोर्स में लगभग 40 प्रतिशत तक विषयों को इलेक्टिव बनाया गया है, ताकि छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुसार विषय चुन सकें। संस्थान ने इंटरडिसिप्लिनरी डुअल डिग्री और माइनर डिग्री जैसे विकल्प भी शुरू किए हैं।
कुल मिलाकर, IIT मद्रास का यह फैसला तकनीकी शिक्षा को ज्यादा छात्र-केंद्रित और लचीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम होगा, बल्कि उन्हें अपने करियर के लिए समय पर सही निर्णय लेने की आज़ादी भी मिलेगी।