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कांकेर में निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर कलेक्टर सख्त, समय-सीमा बैठक में SIR, धान खरीदी और ई-ऑफिस की समीक्षा

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कांकेर जिले में निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार को लेकर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने कड़ा रुख अपनाया है। साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में उन्होंने जिले में लंबित प्रकरणों और विभिन्न विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। कलेक्टर ने खास तौर पर निर्माणाधीन सड़कों, पुल-पुलियों, शासकीय भवनों और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और काम में तेजी लाना अनिवार्य है।

16 दिसंबर की सुबह साढ़े दस बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चल रहे एसआईआर कार्यों की भी समीक्षा की गई। अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जितेंद्र कुर्रे ने जानकारी दी कि बीएलओ द्वारा डोर-टू-डोर सर्वे का कार्य अंतिम चरण में है और इसे 18 दिसंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बीएलओ और बीएलए स्तर की कार्यवाही अभी जारी है और इसे समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने ई-ऑफिस के माध्यम से कार्यालयीन कार्यों में तेजी लाने पर भी जोर दिया और कहा कि ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन से जिले की रैंकिंग में सुधार होगा।

बैठक में धान खरीदी की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर द्वारा जानकारी पूछे जाने पर खाद्य अधिकारी ने बताया कि जिले में अब तक 1 लाख 27 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी पूरी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 105 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। जिले में कुल 1 लाख 1 हजार 203 पंजीकृत किसान हैं, जिन्होंने 1 लाख 39 हजार 728 हेक्टेयर रकबे में ली गई धान फसल का विक्रय पंजीकृत कराया है। वर्तमान में जिले के 149 धान खरीदी केंद्रों में लगभग 23 प्रतिशत खरीदी पूर्ण हो चुकी है।

बैठक में यह भी बताया गया कि जिले के 4 हजार 640 किसानों द्वारा 948.450 हेक्टेयर रकबे का समर्पण किया गया है। किसानों द्वारा टोकन लिमिट बढ़ाए जाने की मांग पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि 31 जनवरी 2026 तक किसानों को टोकन जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि इसके बाद भी किसी किसान का धान बच जाता है, तो इस विषय में शासन स्तर पर किसानों के हित में उचित निर्णय लिया जाएगा।

कुल मिलाकर बैठक में कलेक्टर ने यह संदेश साफ तौर पर दिया कि चाहे विकास कार्य हों, निर्वाचन से जुड़े दायित्व हों या फिर धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया—हर स्तर पर समयबद्धता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी से काम करना अनिवार्य है।

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