बांग्लादेश की राजधानी ढाका में गुरुवार देर रात हालात अचानक बेकाबू हो गए, जब गुस्से से भरी भीड़ सड़कों पर उतर आई। देखते ही देखते शहर के कई इलाकों में आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा का दौर शुरू हो गया। उपद्रवियों ने न सिर्फ वाहनों और इमारतों को निशाना बनाया, बल्कि मीडिया संस्थानों पर भी हमला बोल दिया। हालात इतने भयावह हो गए कि कुछ जगहों पर पत्रकारों पर जानलेवा हमले किए गए और उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश तक की खबरें सामने आईं।
यह हिंसा इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की। जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, राजधानी ढाका में तनाव तेजी से फैल गया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने करवान बाजार इलाके में स्थित प्रतिष्ठित अखबार प्रोथोम आलो के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की, जबकि द डेली स्टार की इमारत को आग के हवाले कर दिया गया। कई मीडिया कर्मियों को जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। हिंसा का यह रूप बांग्लादेश के हालिया इतिहास में मीडिया के खिलाफ सबसे गंभीर हमलों में गिना जा रहा है।
उपद्रव की आग सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, राजशाही में भी हालात बिगड़ गए, जहां अवामी लीग के दफ्तरों को निशाना बनाते हुए आगजनी की गई। अलग-अलग शहरों में फैली इस हिंसा ने देश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि हादी की मौत की पुष्टि होते ही बड़ी संख्या में लोग शाहबाग चौराहे पर जमा हो गए। वहां प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया और हाथों में तख्तियां लेकर सुरक्षा में भारी चूक का आरोप लगाया। स्थिति बिगड़ती देख अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने तुरंत उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
गौरतलब है कि 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉयनगर इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी थी। पहले उनका इलाज ढाका में किया गया, लेकिन हालत नाजुक होने पर 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर ले जाया गया। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई, जिसकी आधिकारिक पुष्टि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय और सिंगापुर प्रशासन ने की।
हादी की मौत ने पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को और भड़का दिया है। फिलहाल ढाका समेत कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह काबू में नहीं बताए जा रहे हैं। देश में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जबकि मीडिया की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है।