दिग्गज टेक कंपनी Google ने अपने कुछ कर्मचारियों को लेकर एक अहम आंतरिक चेतावनी जारी की है। कंपनी ने उन कर्मचारियों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा न करने की सलाह दी है, जो अमेरिकी वीजा पर काम कर रहे हैं। वजह साफ है—अमेरिकी दूतावासों और कॉन्सुलेट्स में वीजा स्टैंपिंग के लिए अपॉइंटमेंट मिलने में असामान्य रूप से लंबी देरी। गूगल के भीतर साझा किए गए एक मेमो के मुताबिक, कुछ देशों में यह इंतजार 12 महीने तक पहुंच गया है, जिससे विदेश जाने वाले कर्मचारी लंबे समय तक अमेरिका के बाहर फंस सकते हैं।
यह सलाह खासतौर पर H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि टेक इंडस्ट्री में इसी वीजा पर बड़ी संख्या में विदेशी प्रोफेशनल्स काम करते हैं। अगर किसी कर्मचारी को वीजा स्टैंप की जरूरत है और वह देश से बाहर जाता है, तो अमेरिका में दोबारा एंट्री में लंबा समय लग सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए यात्रा टालने की बात कही गई है।
बताया गया है कि 18 दिसंबर को गूगल के साथ काम करने वाली बाहरी इमिग्रेशन लॉ फर्म BAL Immigration Law ने यह मेमो जारी किया था। इसमें कहा गया कि कई अमेरिकी एम्बेसी और कॉन्सुलेट में वीजा स्टैंपिंग अपॉइंटमेंट की वेटिंग लिस्ट एक साल तक पहुंच चुकी है। इस देरी का असर सिर्फ H-1B तक सीमित नहीं है, बल्कि H-4, F, J और M जैसे अन्य वीजा कैटेगरी पर भी पड़ रहा है। इस पूरे मुद्दे पर गूगल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
इस देरी की एक बड़ी वजह मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन जांच मानी जा रही है। Trump administration के दौरान H-1B वीजा आवेदनों की जांच प्रक्रिया और कड़ी कर दी गई है, जिसमें सोशल मीडिया अकाउंट्स की स्क्रीनिंग भी शामिल है। United States Department of State का कहना है कि हर केस की गहन समीक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। नई पॉलिसी के तहत ऑनलाइन प्रेजेंस की जांच के कारण कई अपॉइंटमेंट कैंसिल हुए हैं और नई तारीखें मार्च 2026 तक की मिल रही हैं। भारत, आयरलैंड और वियतनाम जैसे देशों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
यह पहली बार नहीं है जब गूगल ने ऐसी सलाह दी हो। इससे पहले सितंबर में भी गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet ने H-1B वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों से अमेरिका में ही रहने को कहा था। अब एक बार फिर हालात उसी दिशा में जाते दिख रहे हैं। इसी साल नए H-1B एप्लीकेशन पर फीस बढ़ाकर एक लाख डॉलर किए जाने से भी इस प्रोग्राम पर दबाव बढ़ा है।
H-1B वीजा को अमेरिकी टेक सेक्टर की रीढ़ माना जाता है। यह हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए होता है, जिनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां करती हैं। इस वीजा पर काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी भारत और चीन से आते हैं। वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए मिलता है और आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन विदेश यात्रा के बाद दोबारा वीजा स्टैंप कराना जरूरी होता है, जो मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
आने वाले समय को लेकर इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्थिति और सख्त हो सकती है। नई वेटिंग पॉलिसी पूरी तरह लागू होने के बाद देरी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कई अपॉइंटमेंट पहले ही रद्द हो चुके हैं। ऐसे में कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि अगर बेहद जरूरी न हो, तो अपने ट्रैवल प्लान फिलहाल टाल दें, क्योंकि एक बार बाहर जाने पर अमेरिका वापसी में लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।