छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर संतों को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रायपुर से दुर्ग रवाना होने से पहले मीडिया से चर्चा में सीएम साय ने कहा कि पं. धीरेंद्र शास्त्री को बीजेपी का एजेंट बताना सिर्फ एक व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं, बल्कि सनातन पर सीधा अपमान है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ऋषि-मुनियों की परंपरा वाला देश है और संतों को राजनीतिक चश्मे से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
दरअसल, शुक्रवार को भूपेश बघेल ने कथावाचक पं. धीरेंद्र शास्त्री पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे पैसे बटोरने के लिए छत्तीसगढ़ आते हैं और बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। इसी बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री साय ने इस टिप्पणी को सनातन पर हमला बताते हुए कहा कि संत समाज को इस तरह के आरोपों से जोड़ना ठीक नहीं है और इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आहत होती है।
इस मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाबा बागेश्वर समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं, लेकिन भूपेश बघेल को इसमें परेशानी हो रही है। शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि जहां भूपेश बघेल के कार्यक्रमों में भीड़ नहीं जुटती, वहीं महाराज को सुनने के लिए लाखों लोग स्वतः जुट जाते हैं। उनके मुताबिक, यह जनसमर्थन ही असली फर्क दिखाता है।
इसी दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मुस्लिम समाज द्वारा पुलिस जांच को लेकर किए गए प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच कोई अचानक शुरू नहीं हुई है और पुलिस के काम में सभी को सहयोग करना चाहिए। एसआईआर से जुड़े सवालों पर उन्होंने साफ किया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की जांच होगी और जो भी अवैध रूप से रह रहे पाए जाएंगे, उन्हें वापस भेजा जाएगा। शर्मा के इस बयान ने सियासी बहस को और व्यापक बना दिया है।
कुल मिलाकर, पं. धीरेंद्र शास्त्री को लेकर शुरू हुआ बयानबाज़ी का सिलसिला अब संत, सनातन, आस्था और राजनीति के बड़े टकराव में बदलता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में और कितना तूल पकड़ता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।