केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर सीधा और कड़ा प्रहार किया। मंगलवार को अपने दौरे के दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाह ने कहा कि ममता सरकार राज्य में अवैध घुसपैठ रोकने में पूरी तरह विफल रही है। उनका दावा था कि यदि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो सीमा इतनी सख्त होगी कि “परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा” और घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर किया जाएगा।
शाह ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन में राज्य का माहौल भयग्रस्त हो गया है और विकास की रफ्तार थम गई है। उनके मुताबिक केंद्र सरकार जहां देशभर में गरीबी उन्मूलन और कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है, वहीं बंगाल में वही योजनाएं ‘डेड एंड’ पर पहुंच गई हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में “विकास की गंगा” बहेगी।
घुसपैठ के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए शाह ने कहा कि यह केवल बंगाल नहीं, पूरे देश का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई सरकार अगर घुसपैठियों की पनाहगार बनती है तो वह राष्ट्र की सुरक्षा से खिलवाड़ करती है। महिला सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने संदेशखाली और आरजी कर जैसे मामलों का हवाला दिया और कहा कि ममता सरकार महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम रही है।
हिंदुओं की स्थिति पर शाह ने तीखा लहजा अपनाते हुए कहा कि अब मरहम लगाने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि बंगाल के हिंदुओं के दिल पर गहरे घाव हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता अंतिम फैसला करती है और अब ममता सरकार के जाने का समय आ गया है। केंद्र की योजनाओं पर राज्य सरकार के रवैये को लेकर शाह ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बने नियमों को तोड़ा जाता है, मनमानी होती है और प्रॉक्सी अधिकारियों के जरिए सिस्टम चलाया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों पर विरोध की राजनीति का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि बंगाल में पीएम विरोध की मानसिकता फैलाई जा रही है। किसानों के 10 हजार करोड़ रुपये और आयुष्मान योजना को लागू न करने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने राज्य सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
मीडिया के सवालों पर जवाब देते हुए शाह ने मेट्रो परियोजनाओं में देरी के लिए जमीन उपलब्ध न कराए जाने को कारण बताया और कहा कि दूसरे राज्यों में ऐसी समस्या क्यों नहीं आती, केवल बंगाल में ही क्यों। बीएसएफ से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखे, लेकिन बॉर्डर फेसिंग के लिए जमीन देने में राज्य सरकार अड़चन डाल रही है।
कुल मिलाकर, शाह के बयान ने 2026 के बंगाल चुनावों की सियासी दिशा साफ कर दी है। घुसपैठ, सुरक्षा, विकास और केंद्र-राज्य टकराव—इन मुद्दों को लेकर भाजपा आक्रामक मोड में दिख रही है, जबकि ममता सरकार पर आरोपों की बौछार ने बंगाल की राजनीति को और गरमा दिया है।