अमेरिका के प्रभावशाली थिंक टैंक Council on Foreign Relations ने 2026 को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। संस्था की रिपोर्ट ‘Conflicts to Watch in 2026’ के मुताबिक कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियां भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव को जन्म दे सकती हैं। रिपोर्ट में इस संभावना को “मध्यम स्तर” का जोखिम बताया गया है, लेकिन यह भी साफ किया गया है कि अगर ऐसा हुआ तो उसका असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा और अमेरिकी हित भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है, लेकिन खुफिया संकेत चिंताजनक हैं। सर्दियों में जम्मू क्षेत्र में दर्जनों पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिससे नियंत्रण रेखा के दोनों ओर तनाव बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों द्वारा हथियारों की खरीद में तेजी को भी संभावित संघर्ष का संकेत माना गया है।
संघर्षविराम के बावजूद सैन्य तैयारियां तेज
मई 2025 के संघर्षविराम के बाद भी भारत और पाकिस्तान ने सैन्य साजो-सामान की खरीद तेज कर दी है। भारत ने हाल में ड्रोन, एयर-टू-एयर मिसाइल और गाइडेड बम सहित बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। दूसरी ओर पाकिस्तान तुर्किये और चीन से नए ड्रोन व एयर-डिफेंस सिस्टम हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया है कि 2025 के सैन्य टकराव में भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को निशाना बनाया था, जिसके बाद इस्लामाबाद अपनी क्षमताओं की भरपाई में जुटा है।
अफगानिस्तान मोर्चे पर भी खतरा
CFR की रिपोर्ट केवल भारत-पाक तक सीमित नहीं है। इसमें 2026 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी सशस्त्र संघर्ष की “मध्यम संभावना” जताई गई है। डूरंड लाइन पर हालिया झड़पों, सीमा चौकियों पर हमलों और व्यापारिक रिश्तों में आई कड़वाहट को इस खतरे की वजह बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट मानती है कि इस मोर्चे का असर अमेरिकी हितों पर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा।
अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए संकेत
यह रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों के सर्वे पर आधारित है और इसका उद्देश्य वॉशिंगटन को उन क्षेत्रों के प्रति सतर्क करना है, जहां आने वाले समय में बड़े टकराव उभर सकते हैं। दक्षिण एशिया को टियर-2 जोखिम श्रेणी में रखते हुए CFR ने इशारा किया है कि भारत-पाकिस्तान और पाकिस्तान-अफगानिस्तान—दोनों मोर्चों पर हालात बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। कुल मिलाकर संदेश साफ है: 2026 में क्षेत्रीय शांति के लिए कश्मीर और सीमावर्ती इलाकों पर कड़ी नजर और सक्रिय कूटनीति बेहद जरूरी होगी।