हिंदू पूजा-पाठ में चंदन का स्थान बेहद खास माना जाता है। तिलक, अभिषेक और हवन जैसे धार्मिक कार्यों में चंदन का उपयोग शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि शुद्ध चंदन मन को शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। लेकिन आज के समय में बाजार में नकली चंदन, केमिकल से बने पेस्ट और खुशबू वाले विकल्प इतनी अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं कि अक्सर यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि घर के मंदिर में रखा चंदन वास्तव में असली है या नहीं। देखने में चंदन चाहे जैसा भी लगे, उसकी खुशबू, ठंडक और असर ही उसकी असली पहचान बताते हैं।
असली चंदन की खुशबू सबसे पहला संकेत देती है। इसकी सुगंध हल्की, ठंडी और प्राकृतिक होती है, जो समय के साथ भी बनी रहती है और सिर में भारीपन नहीं लाती। इसके विपरीत नकली चंदन की खुशबू तेज और कृत्रिम होती है, जो कुछ ही देर में उड़ जाती है। अगर आपके पास चंदन की लकड़ी है, तो पानी के साथ उसे पत्थर पर घिसकर देखें। शुद्ध चंदन घिसने पर दूधिया सफेद या हल्का पीला रंग देता है, जबकि नकली चंदन का रंग अक्सर बहुत गाढ़ा या असामान्य दिखता है।
त्वचा पर लगाने से भी पहचान आसान हो जाती है। असली चंदन त्वचा पर लगते ही ठंडक देता है और किसी तरह की जलन या खुजली नहीं करता। वहीं नकली या केमिकल मिला चंदन लगाने पर जलन, लालपन या खुजली की शिकायत हो सकती है, खासकर संवेदनशील त्वचा वालों में। पाउडर या पेस्ट की स्थिति में पानी की जांच भी कारगर रहती है। असली चंदन पानी में डालने पर धीरे-धीरे नीचे बैठता है और पानी ज्यादा रंगीन नहीं होता, जबकि नकली चंदन तुरंत घुलकर पानी का रंग बदल देता है।
कीमत और स्रोत भी चंदन की शुद्धता का बड़ा संकेत होते हैं। असली चंदन दुर्लभ और महंगा होता है, इसलिए अगर कोई चंदन बहुत सस्ती कीमत पर मिल रहा है, तो उसके नकली होने की संभावना अधिक रहती है। हमेशा भरोसेमंद दुकान, आयुर्वेदिक स्टोर या प्रमाणित विक्रेता से ही चंदन खरीदना बेहतर माना जाता है। थोड़ी सी सावधानी और सही पहचान से आप अपने पूजाघर में शुद्ध चंदन का उपयोग कर सकते हैं और पूजा-पाठ का आध्यात्मिक लाभ पूरी तरह प्राप्त कर सकते हैं।