रात की क्रेविंग से परेशान हैं? वजह समझिए और आदत पर पाइए काबू

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दिनभर संतुलित भोजन करने के बावजूद अगर रात ढलते ही कुछ न कुछ खाने की तलब सताने लगे, तो इसे सिर्फ भूख मानकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। अक्सर यह शरीर की किसी कमी, दिनभर की अनियमित दिनचर्या या फिर मानसिक थकान का संकेत होती है। खासकर मीठा, चिप्स या तला-भुना खाने की चाह रात के समय ज्यादा तेज़ हो जाती है, जिसका सीधा असर वजन और नींद दोनों पर पड़ता है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी समझदारी और सही आदतों के साथ इस क्रेविंग को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

रात में बार-बार खाने की इच्छा के पीछे कई वजहें काम करती हैं। दिन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर न मिलना, लंबे समय तक खाली पेट रहना, अनियमित खाने का शेड्यूल, तनाव और नींद की कमी शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देती है। इसके अलावा देर रात मोबाइल या टीवी देखते हुए बिना सोचे-समझे कुछ खाते रहने की आदत भी दिमाग को खाने के लिए उकसाती रहती है, भले ही शरीर को असल में भूख न हो।

अगर डिनर सही तरीके से लिया जाए तो रात की क्रेविंग अपने आप कम होने लगती है। हल्का लेकिन पौष्टिक भोजन, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट शामिल हो, पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। केवल कार्बोहाइड्रेट पर आधारित डिनर जल्दी पच जाता है और कुछ ही देर में दोबारा भूख लगने लगती है, जिससे रात में स्नैकिंग बढ़ जाती है।

कई बार शरीर भूख नहीं बल्कि पानी की कमी का संकेत देता है, जिसे हम खाने की तलब समझ लेते हैं। ऐसे में रात में कुछ खाने का मन हो तो सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी पीकर देखें। अक्सर इससे पेट भरा हुआ महसूस होता है और अनावश्यक कैलोरी लेने से बचाव हो जाता है।

अगर क्रेविंग बहुत ज्यादा हो और खुद को रोक पाना मुश्किल लगे, तो जंक फूड की जगह हेल्दी विकल्प चुनना बेहतर होता है। हल्के और पौष्टिक स्नैक्स न सिर्फ शरीर को जरूरी पोषण देते हैं, बल्कि पेट पर भी भारी नहीं पड़ते और अपराधबोध के बिना संतुष्टि देते हैं।

तनाव और नींद की अनदेखी भी रात की भूख को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है। जब नींद पूरी नहीं होती या दिमाग लगातार तनाव में रहता है, तो भूख से जुड़े हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं। रोज़ाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद, सोने से पहले मोबाइल से दूरी और हल्की स्ट्रेचिंग या मेडिटेशन जैसी आदतें दिमाग को शांत रखती हैं और क्रेविंग को कम करने में मदद करती हैं।

इसके साथ ही, रोज़ एक तय समय पर डिनर करने की आदत शरीर को एक रूटीन में ढाल देती है। जब शरीर को खाने और सोने का समय समझ में आने लगता है, तो देर रात बार-बार खाने की इच्छा अपने आप कमजोर पड़ने लगती है। थोड़ी जागरूकता और निरंतरता से रात की क्रेविंग पर काबू पाना मुश्किल नहीं, बस ज़रूरत है सही संकेतों को समझने और उन पर अमल करने की।

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