छत्तीसगढ़ कांग्रेस में झीरम कांड को लेकर उठा विवाद अब संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पार्टी लाइन से हटकर बयानबाज़ी को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पद से हटा दिया है और उनसे कारण बताओ नोटिस के जरिए जवाब तलब किया गया है। पार्टी ने उनसे तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है।
यह कार्रवाई तब हुई जब झीरम वृहद जांच आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कुछ वरिष्ठ नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग सामने आई। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू ने स्पष्ट किया कि झीरम की घटना भाजपा शासनकाल में हुई थी और इसकी जिम्मेदारी उसी सरकार पर बनती है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी एकजुट होकर पीड़ित परिवारों और जनता के साथ खड़ी है, ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का नाम जोड़कर सार्वजनिक मंचों पर प्रचार करना अनुशासन के खिलाफ है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि वरिष्ठ प्रवक्ता होने के नाते विकास तिवारी के बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन के अनुरूप होने चाहिए थे। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर उन्हें प्रवक्ता पद से मुक्त किया गया है। पार्टी का संदेश साफ है कि संगठनात्मक एकता और जिम्मेदार बयानबाज़ी से कोई समझौता नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में विकास तिवारी ने झीरम कांड पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के जांजगीर-चांपा भाषण का हवाला देते हुए कुछ कांग्रेस नेताओं के भी नार्को टेस्ट की मांग को आगे बढ़ाया और इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि संवेदनशील मामलों में पार्टी की सामूहिक रणनीति और अनुशासन सर्वोपरि है—और उससे अलग रुख पर सख्ती तय है।