तमनार में हुई हिंसा की घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया है। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में महिला आरक्षक के साथ की गई बर्बरता के मामले में पुलिस ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। महिला आरक्षक की वर्दी फाड़कर उन्हें अर्धनग्न करने की घटना में शामिल तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि चौदह अन्य संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए आरोपियों में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल हैं और पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना 27 दिसंबर को उस समय हुई, जब ग्रामीण कोल खदान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। एक महिला आरक्षक की पिटाई की गई, जबकि दूसरी महिला आरक्षक के कपड़े खींचकर फाड़ दिए गए और उन्हें अर्धनग्न अवस्था में दौड़ाया गया। इस दौरान महिला आरक्षक रहम की गुहार लगाती रही, लेकिन उग्र भीड़ पर उसका कोई असर नहीं पड़ा। बाद में इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया, जिसने लोगों में गुस्सा और आक्रोश और बढ़ा दिया।
पूरे मामले की जड़ 8 दिसंबर को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई से जुड़ी बताई जा रही है। जेपीएल कोयला खदान सेक्टर-1 से प्रभावित गांवों के लोग कई दिनों से धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर की सुबह सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और रास्ता जाम कर दिया। प्रशासन ने समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ बढ़ती गई और दोपहर होते-होते हिंसा भड़क उठी। बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस पर पथराव हुआ, महिला थाना प्रभारी तक को लात-घूंसे मारे गए और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। उग्र भीड़ ने पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस तक को आग के हवाले कर दिया।
घटना के अगले दिन वायरल हुए वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया। वीडियो में साफ दिखा कि किस तरह महिला आरक्षक को घेरकर उसके कपड़े फाड़े गए और उसे आधा किलोमीटर तक दौड़ाया गया। यह दृश्य न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरी चोट करता है। इस घटना के बाद महिला पुलिसकर्मियों में भारी आक्रोश देखा गया और आरोपियों का जुलूस निकालने की मांग तक उठी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी इस मामले में तेज रही है। कांग्रेस ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले डेढ़-दो साल में जनता में सरकार और प्रशासन के प्रति गुस्सा और अविश्वास जिस स्तर तक बढ़ा है, वह गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं पहले देखने को नहीं मिलती थीं और मौजूदा हालात सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। तमनार की यह घटना सिर्फ एक कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर गहराते तनाव की भी तस्वीर पेश करती है, जिसे नजरअंदाज करना अब मुश्किल होता जा रहा है।
