भारतीय परंपरा में सकट चौथ वह पावन तिथि है, जब माताएं निर्जल व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की कामना करती हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व 6 जनवरी को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करने से अकाल मृत्यु, रोग और बड़े संकट टल जाते हैं। देश के कुछ गणेश मंदिर ऐसे हैं, जहां सकट चौथ पर की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है और जहां आस्था सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास का सहारा बन जाती है।
मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर सकट चौथ पर श्रद्धालुओं से भर जाता है। यहां गणपति की विशेष आरती और अभिषेक होते हैं। माताएं दुर्वा और मोदक अर्पित कर अपनी संतान के लिए मंगलकामना करती हैं। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि संकट के समय उम्मीद का प्रतीक माना जाता है।
पुणे का तिलक गणेश मंदिर परंपरा और राष्ट्रभाव का अनोखा संगम है। लोकमान्य तिलक से जुड़ा यह मंदिर सकट चौथ पर सामूहिक पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यहां माताएं लाल वस्त्र अर्पित कर संतान की रक्षा की प्रार्थना करती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
पुणे का ही दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर संतान-संरक्षा की भावना से गहराई से जुड़ा है। संतान शोक से दुखी दंपती द्वारा स्थापित यह मंदिर आज विश्वास का बड़ा केंद्र बन चुका है। सकट चौथ पर यहां हजारों माताएं व्रत करती हैं और माना जाता है कि गणपति यहां संकटों को हर लेते हैं।
राजस्थान के रणथंभौर के जंगलों के बीच स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां आज भी लोग विवाह और शुभ कार्यों के निमंत्रण गणपति को भेजते हैं। सकट चौथ पर संतान की रक्षा के लिए विशेष हवन और पूजा होती है। यह मंदिर बताता है कि सच्ची आस्था को भव्य भवन नहीं, बल्कि विश्वास चाहिए।
सकट चौथ पर इन मंदिरों में की गई पूजा यह भरोसा देती है कि जब जीवन में हर रास्ता बंद सा लगे, तब भी गणपति का द्वार खुला रहता है और मां की प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती।




