MPPSC सहायक प्राध्यापक भर्ती 2026: उच्च शिक्षा विभाग में 949 पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ, फरवरी से शुरू होंगे आवेदन

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मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापक भर्ती 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 949 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। जैसे ही आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, योग्य अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट mppsc.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

इस भर्ती के जरिए कला, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान संकाय के विभिन्न विषयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। विषयवार पदों पर नजर डालें तो केमिस्ट्री और फिजिक्स में सबसे ज्यादा वैकेंसी रखी गई है। इसके अलावा कॉमर्स, इकोनॉमिक्स, इतिहास, भूगोल, हिंदी और अंग्रेज़ी जैसे विषयों में भी बड़ी संख्या में पद उपलब्ध कराए गए हैं। राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, विधि, संस्कृत, भूविज्ञान और योगिक साइंस जैसे विषय भी इस भर्ती में शामिल हैं। इन पदों का आरक्षण सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किया गया है।

आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार नोटिफिकेशन 31 दिसंबर 2025 को जारी किया गया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 फरवरी 2026 से शुरू होगी और 26 मार्च 2026 तक चलेगी। अभ्यर्थियों को तय समय-सीमा के भीतर आवेदन करना होगा, क्योंकि इसके बाद कोई मौका नहीं दिया जाएगा।

योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों को नियमों के तहत आयु में छूट मिलेगी। शैक्षणिक योग्यता के तौर पर संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री अनिवार्य है। इसके साथ ही UGC, CSIR, ICAR NET, SET या SLET परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी होगा। हालांकि, यूजीसी के नियमों के अनुसार पीएचडी धारकों को नेट परीक्षा से छूट दी गई है।

आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे विषयवार पदों, आरक्षण, चयन प्रक्रिया और अन्य शर्तों से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत अधिसूचना को ध्यान से पढ़ लें। यह भर्ती न केवल शिक्षण क्षेत्र में स्थायी करियर का अवसर देती है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में योग्य शिक्षकों की कमी को भी पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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