देश से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्र सरकार ने निर्णायक रुख अपना लिया है और अब यह अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने की घोषित डेडलाइन के बाद से लगातार बड़े ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और सख्त रणनीति देखने को मिल रही है। अब जब तय समय में तीन महीने से भी कम वक्त बचा है, तो नक्सलवाद पर आखिरी प्रहार की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में खबर है कि अमित शाह इसी महीने छत्तीसगढ़ दौरे पर आकर पूरे अभियान की गहन समीक्षा कर सकते हैं।
डेडलाइन तय होने के बाद से अमित शाह लगातार छत्तीसगढ़ आते रहे हैं और हर दौरे में नक्सल मोर्चे पर रणनीतिक दिशा तय करते रहे हैं। केंद्र सरकार की गंभीरता का असर जमीन पर साफ दिख रहा है—एक ओर जहां सुरक्षाबलों के अभियानों में नक्सली कैडर ढेर हो रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण भी हो रहा है। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी और अमित शाह का चार दिन तक ठहरना इसी प्राथमिकता को दर्शाता है। उस सम्मेलन के कुछ ही दिनों बाद अमित शाह बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में भी पहुंचे थे। अब एक बार फिर उनके आगमन की तैयारी है।
जानकारों के मुताबिक, इस महीने रायपुर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हो सकती है, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा सहित नक्सल मोर्चे से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक में अब तक की प्रगति, मौजूदा हालात और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। लक्ष्य साफ है—मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए बचे हर मोर्चे पर निर्णायक कदम उठाना।
कुल मिलाकर, केंद्र और राज्य की साझा रणनीति, लगातार फील्ड एक्शन और उच्चस्तरीय निगरानी यह संकेत दे रही है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। अमित शाह की प्रस्तावित समीक्षा बैठक को इसी अभियान में “आखिरी कील” ठोकने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।