नए साल की पहली बड़ी चुनौती के तौर पर मंगलवार से शुरू हो रहे Malaysia Open में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों की नजरें मजबूती से वापसी करने पर होंगी। पिछला सत्र उतार-चढ़ाव और चोटों से भरा रहा, ऐसे में अब भारतीय खिलाड़ी बीते अनुभवों को पीछे छोड़ते हुए नए सत्र की सकारात्मक शुरुआत करना चाहेंगे।
इस प्रतिष्ठित सुपर 1000 टूर्नामेंट में भारत के प्रमुख सितारे Lakshya Sen और PV Sindhu एक बार फिर कोर्ट पर खुद को साबित करने उतरेंगे। साल 2025 भारतीय बैडमिंटन के लिए खासा चुनौतीपूर्ण रहा, जहां कई शीर्ष खिलाड़ी खराब फॉर्म और चोटों से जूझते नजर आए। अब मलेशिया ओपन से उम्मीद की जा रही है कि भारतीय अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी।
लक्ष्य सेन अपने अभियान की शुरुआत सिंगापुर के जिया हेंग जेसन तेह के खिलाफ करेंगे। पेरिस ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने के बाद लक्ष्य लगातार संघर्ष करते दिखे थे, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई ओपन सुपर 500 का खिताब जीतकर उन्होंने अपनी लय वापस पाई। इसके अलावा हांगकांग ओपन के फाइनल तक पहुंचना भी उनके आत्मविश्वास का संकेत रहा है। मलेशिया ओपन में वह उसी लय को बरकरार रखते हुए आगे बढ़ना चाहेंगे, ताकि अगले सप्ताह दिल्ली में होने वाले इंडिया ओपन सुपर 750 के लिए ठोस तैयारी हो सके।
महिला एकल में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू के लिए पिछला साल निराशाजनक रहा। पैर की चोट के चलते वह अक्टूबर के बाद से कोर्ट से दूर थीं। अब उनकी वापसी पर सभी की नजरें होंगी। पहले दौर में उनका सामना चीनी ताइपे की सुंग शुओ युन से होगा, जहां सिंधू नए सत्र की मजबूत शुरुआत करने के इरादे से उतरेंगी।
युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह टूर्नामेंट बड़ी परीक्षा साबित होगा। यूएस ओपन सुपर 300 खिताब जीत चुके आयुष शेट्टी को पहले दौर में पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मलेशिया के ली जी जिया जैसी कड़ी चुनौती का सामना करना है। वहीं दूसरी बार ओडिशा ओपन खिताब जीत चुकी उन्नति हुड्डा का मुकाबला टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और चौथी वरीय चीन की चेन यू फेइ से होगा। घुटने की चोट के बाद छह महीने में वापसी कर रहीं मालविका बंसोड के सामने भी पूर्व विश्व चैंपियन थाईलैंड की रेचानोक इंतानोन की कठिन परीक्षा होगी।
डबल्स में भारत की स्टार जोड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty भी मलेशिया ओपन में उतर रही है। इस जोड़ी ने पिछले साल हांगकांग ओपन और चाइना मास्टर्स के फाइनल में जगह बनाई थी और विश्व चैंपियनशिप में दूसरी बार कांस्य पदक जीता था। पहले दौर में उनका सामना चीनी ताइपे की ली झे हुइ और यांग पो सुआन की जोड़ी से होगा।
कुल मिलाकर मलेशिया ओपन भारतीय बैडमिंटन के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि नए सत्र की दिशा तय करने वाला मंच साबित हो सकता है। मजबूत शुरुआत से न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भी राह आसान होगी।