लैंड फॉर जॉब स्कैम में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश जारी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर इस मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं और अब अगला चरण ट्रायल का होगा।
विशेष अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रेलवे में चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के बदले जमीन लेने के आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। कोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में ऐसे तथ्य और साक्ष्य सामने आए हैं, जो विस्तृत सुनवाई की मांग करते हैं। इसी आधार पर अदालत ने लालू यादव और राबड़ी देवी सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया है।
हालांकि, अदालत ने इस मामले में 52 अन्य आरोपियों को राहत भी दी है। चार्जशीट की समीक्षा के बाद कोर्ट ने माना कि इन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उन्हें बरी कर दिया गया है। अब इस केस में Central Bureau of Investigation की ओर से आरोपियों के खिलाफ गवाहों और सबूतों को पेश किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की गई है, जहां से ट्रायल की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।
आरोप तय होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग लालू परिवार से राजनीतिक रूप से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं, वही अब जांच एजेंसियों का सहारा लेकर इस परिवार को निशाना बना रहे हैं। राजद का कहना है कि यह पूरी लड़ाई कानूनी है और पार्टी अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
कुल मिलाकर, लैंड फॉर जॉब स्कैम में आरोप तय होने के साथ ही लालू परिवार के लिए कानूनी चुनौती और गंभीर हो गई है। अब सबकी निगाहें ट्रायल पर टिकी हैं, जहां गवाहों और सबूतों के आधार पर यह तय होगा कि यह मामला राजनीतिक साजिश साबित होता है या फिर भ्रष्टाचार के आरोप न्यायिक कसौटी पर खरे उतरते हैं।