कर्ज के भारी बोझ से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea Limited के शेयरों में शुक्रवार, 9 जनवरी को जबरदस्त उछाल देखने को मिला। दिन के कारोबार में स्टॉक करीब 8% चढ़कर ₹12.40 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। यह तेजी सरकार की ओर से AGR बकाया चुकाने को लेकर मिली बड़ी राहत के बाद आई, जिसने बाजार में यह संकेत दिया कि फिलहाल कंपनी पर तुरंत नकदी दबाव कम होने वाला है।
सरकार ने वोडाफोन-आइडिया को AGR बकाया चुकाने के लिए लंबा समय देते हुए अगली 15 साल की किश्तों में भुगतान की अनुमति दे दी है। Department of Telecommunications से मिले पत्र के मुताबिक कंपनी को FY 2006-07 से FY 2018-19 तक के बकाया के लिए नया पेमेंट शेड्यूल मिला है। मार्च 2026 से किश्तों की शुरुआत होगी और भुगतान 2041 तक चलेगा। शुरुआती पांच वर्षों में सालाना अपेक्षाकृत कम राशि चुकानी होगी, इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी रकम अदा की जाएगी। साथ ही सरकार एक समिति बनाकर AGR देनदारियों की दोबारा जांच भी करेगी, जिससे भविष्य में आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
इस राहत के बाद शेयर बाजार में बहस तेज हो गई है कि क्या यह वोडाफोन-आइडिया के लिए सच में टर्निंग पॉइंट है या फिर सिर्फ समस्या को आगे टालने का कदम। बाजार विश्लेषकों की राय साफ तौर पर बंटी हुई है। एडलिटिक के फाउंडर आदित्य अरोड़ा का मानना है कि कंपनी अब केवल अस्तित्व बचाने की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि धीरे-धीरे टर्नअराउंड की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार, ऑपरेशनल दबाव घटने से फंडामेंटल्स में सुधार की गुंजाइश बन रही है।
वहीं, नटवरलाल एंड संस स्टॉकब्रोकर्स के समीर दलाल इसे अब भी ‘टिकिंग टाइम बम’ मानते हैं। उनका तर्क है कि भुगतान की तारीख आगे बढ़ने से कर्ज खत्म नहीं होता। इक्विटी बेस पहले ही काफी डायल्यूट हो चुका है, ऐसे में लंबे समय के निवेशकों के लिए यह स्टॉक अब भी जोखिम भरा बना हुआ है।
टेक्निकल नजरिए से देखें तो कुशबोहरा के फाउंडर कुश बोहरा का कहना है कि शेयर दिसंबर के अंत से ₹12 के आसपास कंसोलिडेशन में है। ऑप्शंस डेटा के मुताबिक इस स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस है। उनका मानना है कि ₹12 के ऊपर निर्णायक ब्रेक मिलने पर और तेजी बन सकती है, जबकि निवेशकों को ₹11.30 का स्टॉप-लॉस ध्यान में रखना चाहिए। फिलहाल स्टॉक करीब ₹11.78 के आसपास कारोबार कर रहा है।
पिछले कुछ महीनों में इस शेयर ने जबरदस्त रिकवरी भी दिखाई है। बीते छह महीनों में करीब 60% की तेजी, तीन महीनों में लगभग 30% और एक महीने में करीब 10% की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बावजूद ब्रोकरेज हाउस अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। Bloomberg के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी को कवर करने वाले 22 एनालिस्ट्स में से सिर्फ 5 ने ‘Buy’ रेटिंग दी है, जबकि अधिकांश ने Sell या Hold की सलाह दी है।
शेयरहोल्डिंग पैटर्न भी इस कहानी को दिलचस्प बनाता है। केंद्र सरकार करीब 49% हिस्सेदारी के साथ वोडाफोन-आइडिया की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है। स्पेक्ट्रम और ब्याज बकाये को इक्विटी में बदलने के बाद सरकार की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है, जिससे कंपनी का भविष्य काफी हद तक नीतिगत फैसलों पर निर्भर नजर आता है।
AGR विवाद की जड़ 1999 की पॉलिसी में हुए बदलाव से जुड़ी है, जब लाइसेंस फीस को फिक्स्ड चार्ज से रेवेन्यू-शेयर मॉडल में बदला गया। AGR में किन-किन आय को जोड़ा जाए, इसी पर सालों तक विवाद चला। आखिरकार 2019 में Supreme Court of India ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद वोडाफोन-आइडिया पर भारी बकाया निकल आया। मार्च 2025 तक यह बोझ बढ़कर करीब ₹83,400 करोड़ पहुंच गया।
अब सरकार की ताजा राहत ने कंपनी को सांस लेने का वक्त जरूर दिया है, लेकिन असली सवाल यही है कि क्या वोडाफोन-आइडिया इस समय का इस्तेमाल अपने बिजनेस मॉडल और रेवेन्यू को मजबूत करने में कर पाएगी, या फिर यह राहत सिर्फ समस्या को भविष्य के लिए टालने भर का उपाय साबित होगी। यही तय करेगा कि मौजूदा तेजी एक नई शुरुआत है या आने वाले खतरे की आहट।