छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पैसा डबल करने के नाम पर 76 निवेशकों से 3 करोड़ 8 लाख की ठगी हुई है। आरोपी ने फाइनेंस अप इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंसी के नाम से संस्था संचालित कर निवेशकों को हर महीने 6 प्रतिशत मुनाफा देने का लालच दिया था। कुछ दिन तक निवेशकों को ब्याज मिलता रहा, लेकिन इसके बाद आरोपी ऑफिस में ताला लगाकर भाग गए। निवेशकों को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के बहाने करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी युवक को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से आईफोन 16 प्रो, लैपटॉप, रुपए गिनने की मशीन, निवेशकों के इकरारनामे सहित कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। मामला सुपेला थाना क्षेत्र का है।
ठग की बात में आकर 20 लाख निवेश किए
जानकारी के अनुसार, 9 अक्टूबर 2025 को पीड़ित ने सुपेला थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि मार्च 2025 में उसका परिचय भिलाई शांति नगर के रहने वाले हार्दिक कुदेषिया (22) से हुआ था।
आरोपी ने खुद को क्रिप्टो ट्रेडिंग में माहिर बताते हुए हर महीने 6 प्रतिशत मुनाफा दिलाने का दावा किया। उसके झांसे में आकर पीड़ित ने अपने और अपने पिता अनुराग के खातों से ऑनलाइन और नकद माध्यम से कुल 20 लाख रुपए निवेश किए।
शुरुआत में देते रहा ब्याज, बाद में ताला लगाकर भागे
शुरुआत में कुछ महीनों तक आरोपी नियमित रूप से ब्याज देता रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ गया। इसी दौरान एक अन्य पीड़ित के पिता भुषण लाल साहू ने भी आरोपी के कहने पर 4 लाख रुपए जमा कराए। ऐसे ही 76 निवेशक झांसे में फंस गए।
अक्टूबर 2025 तक निवेशकों को ब्याज मिलता रहा, लेकिन नवंबर 2025 में अचानक भुगतान बंद हो गया। जब निवेशक आरोपी के कार्यालय अग्रसेन चौक, नेहरू नगर सुपेला पहुंचे तो ऑफिस बंद मिला। आसपास पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपी निवेशकों का पैसा लेकर भाग गए हैं।
अलग-अलग बैंकों में जमा करवाया पैसा
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने साल 2024 में “फाइनेंस अप इन्वेस्टर एंड कंसल्टेंसी” के नाम से ऑफिस खोलकर अपने साथियों के जरिए निवेश कराया। निवेशकों से इकरारनामे बनवाए जाते थे। आरोपी बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और इंडसइंड बैंक के खातों में पैसा जमा कराता था।
इसके बाद मोबाइल में बाइनेस एप डाउनलोड कर भारतीय रुपए को डॉलर में बदलकर क्रिप्टो ट्रेडिंग करता था। मुनाफे का 6 प्रतिशत निवेशकों को और 3 प्रतिशत अपने एजेंटों को देता था, जबकि शेष रकम खुद रख लेता था।
अन्य आरोपियों की भी हो सकती है गिरफ्तारी
पुलिस ने आरोपी हार्दिक कुदेषिया (22) को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। आरोपी के खिलाफ धारा 318(2), 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया है। विवेचना जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
क्रिप्टोकरेंसी का इतिहास
- 1983 में सबसे पहले अमेरिकन क्रिप्टोग्राफर डेविड चाम ने ई-कैश (ecash) नाम से क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी बनाई थी।
- 1995 में डिजिकैश के जरिए इसे लागू किया गया।
- इस पहली क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी को किसी बैंक से नोटों के रूप में विड्रॉल करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता थी।
- यह सॉफ्टवेयर पूरी तरह से एनक्रिप्टेड था। सॉफ्टवेयर के जरिए क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी प्राप्त करने वाले को एनक्रिप्टेड-की यानी खास प्रकार की चाभी दी जाती थी।
- इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से पैसा जारी करने वाला बैंक, सरकार या अन्य थर्ड पार्टी ट्रांजेक्शन को ट्रैक नहीं कर पाते थे।
- 1996 में अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने क्रिप्टोकरेंसी सिस्टम के बारे में बताने वाला एक पेपर पब्लिश किया।
- 2009 में सातोशी नाकामोतो नाम के वर्चुअल निर्माता ने बिटकॉइन नाम की क्रिप्टोकरेंसी बनाई। इसके बाद ही क्रिप्टोकरेंसी को दुनियाभर में लोकप्रियता मिली।