Vitamin D Deficiency: मूड स्विंग से लेकर जोड़ों के दर्द तक, शरीर ऐसे देता है विटामिन डी की कमी का संकेत

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती आदतों ने विटामिन डी की कमी को एक आम लेकिन गंभीर समस्या बना दिया है। धूप में कम समय बिताना, लंबे समय तक घर या ऑफिस में बंद रहना और अनियमित खानपान इसके बड़े कारण बनते जा रहे हैं। खासतौर पर शहरों में रहने वाले लोग, महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग इस कमी से ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं। विटामिन डी सिर्फ हड्डियों की मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम, मांसपेशियों और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

जब शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम होने लगती है, तो सबसे पहले इसका असर लगातार थकान और कमजोरी के रूप में दिखता है। पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होना आम बात बन जाती है। इसकी वजह यह है कि विटामिन डी मांसपेशियों की ताकत और शरीर के एनर्जी मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है, और इसकी कमी से शरीर सुस्त पड़ने लगता है। इसके साथ ही बिना किसी खास चोट या वजह के हड्डियों और जोड़ों में दर्द बना रहना भी एक अहम संकेत हो सकता है। चूंकि विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, इसलिए इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और दर्द या जकड़न महसूस होने लगती है।

इम्यून सिस्टम पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, वे बार-बार सर्दी-खांसी, वायरल या अन्य संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय रखने में मदद करता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द, अकड़न और ऐंठन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। कई बार साधारण चलने-फिरने या सीढ़ियां चढ़ने में भी परेशानी होने लगती है, और बुज़ुर्गों में यह लक्षण और ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है।

विटामिन डी की कमी का असर बालों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है। जरूरत से ज्यादा बाल झड़ना, बालों का पतला और कमजोर होना कई बार इसी कमी की ओर इशारा करता है, क्योंकि विटामिन डी हेयर फॉलिकल्स को मजबूती देने का काम करता है। वहीं मानसिक स्तर पर चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। खासतौर पर जो लोग धूप में बहुत कम समय बिताते हैं, उनमें यह लक्षण ज्यादा देखने को मिलते हैं।

अगर इस तरह के संकेत लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय रहते ब्लड टेस्ट के जरिए विटामिन डी लेवल की जांच कराना जरूरी हो जाता है। डॉक्टर की सलाह से धूप में पर्याप्त समय बिताना, डाइट में जरूरी बदलाव करना और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स लेना इस कमी को दूर करने में मदद कर सकता है। सही समय पर ध्यान देने से न सिर्फ शरीर की ताकत लौटती है, बल्कि मानसिक संतुलन और इम्यून सिस्टम भी मजबूत बना रहता है।

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