मुंबई। साल 2025 भारतीय डिस्काउंट ब्रोकरेज इंडस्ट्री के लिए आसान नहीं रहा। पूरे साल के दौरान रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसने ऑनलाइन ब्रोकरेज बिजनेस की रफ्तार को साफ तौर पर धीमा कर दिया। आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में देशभर में सक्रिय ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या में करीब 53.5 लाख की कमी आई है। इसका सबसे बड़ा असर देश के प्रमुख प्लेटफॉर्म—Zerodha, Groww, Angel One और Upstox—पर देखने को मिला, जहां कुल गिरावट का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा केंद्रित रहा।
दिसंबर 2025 तक सभी ब्रोकर्स को मिलाकर शेयर बाजार में सक्रिय ग्राहकों की संख्या घटकर करीब 4.49 करोड़ रह गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 5.02 करोड़ के आसपास था। यानी लाखों निवेशकों ने या तो ट्रेडिंग से दूरी बना ली या अपने अकाउंट को निष्क्रिय कर दिया। इस गिरावट में सबसे बड़ा झटका जेरोधा को लगा, जहां करीब 12.68 लाख सक्रिय ग्राहक कम हो गए। इसके बाद ग्रो में लगभग 10.32 लाख, एंजेल वन में करीब 9.96 लाख और अपस्टॉक्स में करीब 8.09 लाख निवेशकों की कमी दर्ज की गई।
यह सुस्ती सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं रही। मिराए एसेट कैपिटल, शेयरखान, 5 पैसा कैपिटल, कोटक सिक्योरिटीज, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल, फोनपे वेल्थ ब्रोकिंग, फिनवेसिया, एलिस ब्लू और फायरस जैसे कई जाने-पहचाने ब्रोकरेज हाउस भी सक्रिय ग्राहकों की घटती संख्या से जूझते नजर आए। इससे साफ होता है कि यह ट्रेंड किसी एक कंपनी की रणनीति की विफलता नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर में फैला संरचनात्मक बदलाव है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में आई तेज सुस्ती है। पिछले साल Securities and Exchange Board of India द्वारा लागू किए गए सख्त नियमों ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को छोटे निवेशकों के लिए कम आकर्षक बना दिया। ज्यादा मार्जिन की जरूरत, साप्ताहिक एक्सपायरी में कटौती, कड़े पूंजी मानक और बढ़ता टैक्स बोझ—इन सबने मिलकर आक्रामक ट्रेडिंग का जोश ठंडा कर दिया।
इसके साथ ही 2025 में बाजार की चाल भी निवेशकों के मनोबल के खिलाफ रही। साल की शुरुआत से ही करेक्शन, उम्मीद से कमजोर कॉरपोरेट नतीजे और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने माहौल को दबाव में रखा। कुछ आईपीओ जरूर आए, लेकिन कई लिस्टिंग फीकी रहीं या डिस्काउंट पर हुईं, जिससे रिटेल निवेशकों का भरोसा और डगमगाया। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी जोखिम लेने की प्रवृत्ति को कमजोर किया।
हालांकि पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। कुछ ब्रोकरेज कंपनियों ने इस कठिन माहौल में भी सक्रिय ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में कामयाबी पाई। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज ने करीब 1.55 लाख नए सक्रिय निवेशक जोड़े, जबकि पेटीएम मनी में लगभग 1.41 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में भी करीब 79 हजार नए सक्रिय ग्राहक जुड़े, वहीं एचडीएफसी सिक्योरिटीज, बजाज फाइनेंशियल सिक्योरिटीज, चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग और यस सिक्योरिटीज में सीमित लेकिन सकारात्मक ग्रोथ देखने को मिली।
कुल मिलाकर, 2025 यह संकेत देता है कि भारतीय रिटेल निवेशक अब पहले से ज्यादा सतर्क हो चुका है। तेज मुनाफे के लालच में रोज़ाना ट्रेडिंग करने के बजाय वह म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस और अन्य दीर्घकालिक निवेश विकल्पों को तरजीह दे रहा है। यही बदलाव डिस्काउंट ब्रोकरेज इंडस्ट्री की तस्वीर को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।