आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां इसका असर सीधे-सीधे ऑफिस में काम करने वाले लाखों लोगों की नौकरियों पर पड़ सकता है। टेक दुनिया की चर्चित रिपोर्ट के मुताबिक, चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी OpenAI एक ऐसा एडवांस AI सिस्टम तैयार कर रही है, जो इंसानों के रोज़मर्रा के ऑफिस वर्क को न सिर्फ समझेगा बल्कि कई मामलों में उनसे बेहतर तरीके से खुद ही पूरा कर सकेगा। यह बदलाव केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि काम करने के तरीके की परिभाषा ही बदल सकता है।
टेक मैगज़ीन Wired की रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई अपने नए मॉडल को किताबों या सिम्युलेटेड डेटा से नहीं, बल्कि इंसानों के असली कामकाज से ट्रेन कर रही है। इसके लिए कंपनी ने Handshake AI के साथ साझेदारी की है। अलग-अलग प्रोफेशन से जुड़े कॉन्ट्रैक्टर्स से उनके पुराने और मौजूदा ऑफिस टास्क्स का डेटा लिया जा रहा है, ताकि AI यह सीख सके कि वास्तविक दुनिया में काम कैसे पूरे किए जाते हैं।
इस ट्रेनिंग में दो तरह के डेटा पर खास फोकस किया जा रहा है। पहला वह निर्देश, जो मैनेजर या सहकर्मी किसी टास्क के लिए देते हैं, और दूसरा उस निर्देश के जवाब में तैयार किया गया असली आउटपुट—चाहे वह रिपोर्ट हो, एक्सेल शीट, प्रेज़ेंटेशन या कोई डॉक्यूमेंट। ओपनएआई खास तौर पर ऐसे जटिल कामों का डेटा चाहती है, जिन्हें पूरा करने में इंसानों को घंटों या कई दिन लग जाते हैं। मकसद साफ है—देखना कि नया AI मॉडल इन्हें कितनी तेजी और सटीकता से कर सकता है।
कंपनी का दावा है कि डेटा सिक्योरिटी को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। कॉन्ट्रैक्टर्स को साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी निजी या कंपनी-विशेष जानकारी को पहले हटा दिया जाए। इसके बावजूद, टेक इंडस्ट्री में यह चिंता बढ़ रही है कि जब AI इंसानों की तरह काम करना सीख जाएगा, तो कई वाइट-कॉलर जॉब्स पर सीधा दबाव आएगा। ओपनएआई का दीर्घकालिक लक्ष्य आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस यानी AGI हासिल करना है, जो इंसानों की तरह सोच-समझकर हर तरह का काम कर सके।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका असर सबसे पहले उन सेक्टर्स में दिख सकता है, जहां काम का बड़ा हिस्सा डेटा, डॉक्यूमेंट और प्रोसेस पर आधारित है। डेटा एंट्री और एडमिनिस्ट्रेटिव रोल्स, बेसिक कंटेंट राइटिंग और जूनियर-लेवल कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट, लीगल रिसर्च और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों में AI पहले ही तेज़ी से जगह बना रहा है। रियल-वर्ल्ड ट्रेनिंग के बाद यह दखल और गहरा हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यह पूरी तरह इंसानों को हटाने की कहानी नहीं है, बल्कि काम करने के तरीके के बदलने की शुरुआत है। जो लोग AI को अपने काम का पार्टनर बनाकर इस्तेमाल करना सीखेंगे, उनकी उपयोगिता बनी रहेगी। सॉफ्ट स्किल्स, क्रिटिकल थिंकिंग और लगातार खुद को अपडेट करते रहना आने वाले दौर में सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकती है। साफ है कि AI का यह अगला कदम ऑफिस कल्चर और करियर प्लानिंग—दोनों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर करने वाला है।