हरियाणा के फरीदाबाद से सामने आया यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों तक हिला देने वाला है। BK अस्पताल के हार्ट सेंटर में खुद को हृदय रोग विशेषज्ञ बताकर काम करने वाला डॉक्टर पंकज मोहन अब विशेष जांच टीम यानी SIT के रडार पर है। खुलासा हुआ है कि आरोपी अब तक 50 से अधिक मरीजों की हार्ट सर्जरी कर चुका है। फिलहाल वह पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर है, लेकिन जांच एजेंसियां अब उससे गहन पूछताछ की तैयारी में जुट गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, BK अस्पताल के हार्ट सेंटर में सामने आए इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े को लेकर SIT टीम ने अपनी रणनीति तय कर ली है। SGM नगर थाना SHO सुनील कुमार ने ACP क्राइम वरुण दहिया से इस मामले को लेकर चर्चा की है, ताकि पूछताछ और आगे की कार्रवाई को ठोस दिशा दी जा सके। पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरा सिस्टम और मिलीभगत की आशंका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल जून में अधिवक्ता संजय गुप्ता की शिकायत पर इस घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुई थीं। शिकायत के बाद पुलिस ने कथित फर्जी हृदयरोग विशेषज्ञ डॉक्टर पंकज मोहन शर्मा के साथ-साथ हार्ट सेंटर को PPP मोड पर संचालित करने वाली कंपनी मेडिट्रिना हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के CMD डॉक्टर एन प्रताप कुमार, HR हेड दलीप नायर, सेंटर हेड पीयूष श्रीवास्तव, मंदीप और हरियाणा सेंटर हेड अजय शर्मा के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया था। इससे साफ संकेत मिला कि मामला केवल एक फर्जी डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरे प्रबंधन तंत्र पर सवाल खड़े करने वाला है।
जांच में सामने आया कि आरोपी डॉक्टर ने खुद को असली हृदय रोग विशेषज्ञ साबित करने के लिए एक और चौंकाने वाली चाल चली। उसने राजस्थान के जयपुर में कार्यरत एक वास्तविक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के पंजीकरण नंबर का इस्तेमाल कर BK अस्पताल में नियुक्ति हासिल की। इसी फर्जी पहचान के सहारे उसने दर्जनों मरीजों की हार्ट सर्जरी कर डाली। जब यह सच उजागर हुआ, तो स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे और SIT का गठन किया गया।
NIT-3 पुलिस चौकी प्रभारी मनोज कुमार के अनुसार, आरोपी डॉक्टर से पूछताछ की पूरी तैयारी की जा चुकी है और जल्द ही उसे SIT के सामने पेश किया जाएगा। पूछताछ पूरी होने के बाद टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें यह तय होगा कि इस फर्जीवाड़े में किन-किन लोगों की भूमिका रही और आगे किन पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। यह मामला न केवल कानून का, बल्कि मरीजों की जान और भरोसे का भी है, ऐसे में अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।