कुर्मी समाज के मंच पर भूपेश का तीखा तेवर: बोले— सम्मान नहीं दे सकते तो बुलाया ही मत, BJP नेताओं को ‘मिर्ची’ लग रही है

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छत्तीसगढ़ के बालोद में आयोजित कुर्मी क्षत्रिय समाज के वार्षिक सम्मेलन के दौरान सियासी तापमान उस वक्त अचानक बढ़ गया, जब मंच से बोलते हुए भूपेश बघेल खुलकर नाराज़ हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि अगर किसी अतिथि को सम्मान नहीं दिया जा सकता, तो उसे कार्यक्रम में आमंत्रित करने का कोई औचित्य नहीं है। उनका यह बयान तब आया, जब मंच पर मौजूद भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेताओं ने भाषण के दौरान उन्हें “राजनीतिक बातें न करने” की नसीहत दे दी।

मंच से बोलते हुए बघेल ने किसानों, धान खरीदी और व्यवस्था की खामियों का जिक्र किया। इसी बीच समाज के महामंत्री और भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने यह कहते हुए टोका कि यह सामाजिक मंच है, यहां राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस पर भूपेश बघेल भड़क उठे। उन्होंने सवाल किया कि किसान के हितों की बात कब से राजनीति हो गई, और तंज कसते हुए कहा कि दूसरे दल के लोगों को उनकी बातों से “बहुत मिर्ची” लग रही है। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि जिन्हें उनकी बातों से तकलीफ है, उनके लिए वे किसी तरह का खेद प्रकट नहीं करेंगे।

पूरा घटनाक्रम 18 जनवरी को बालोद के सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान में हुए सम्मेलन का है, जहां हजारों की संख्या में समाजजन मौजूद थे। भाषण के दौरान बघेल ने आरोप लगाया कि धान से भरे ट्रक गायब हो रहे हैं और जंगलों में लावारिस हालत में मिल रहे हैं। उन्होंने इसे सिस्टम की गंभीर नाकामी बताते हुए कहा कि या तो निगरानी तंत्र कमजोर है या भीतर ही भीतर बड़ी गड़बड़ी चल रही है। बीच में टोके जाने पर उनका गुस्सा साफ झलक गया और उन्होंने समाज को नसीहत दी कि किसी को बुलाओ तो सम्मान देना सीखो, वरना बुलाना ही मत।

दूसरी ओर, भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने बाद में कहा कि कार्यक्रम सामाजिक था, लेकिन भूपेश बघेल ने मंच को कांग्रेस बनाम भाजपा की बहस में बदल दिया। उनके मुताबिक, अगर राजनीति करनी थी तो कांग्रेस की सभा रखी जानी चाहिए थी। इस पूरे कार्यक्रम में भाजपा के कई नेता मंच पर मौजूद थे, जिनमें वरिष्ठ नेता, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी शामिल थे।

बघेल ने मंच से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खुद सरकार यह कह रही है कि 30 करोड़ रुपये का धान चूहा खा गया, जो अपने आप में सिस्टम की हालत बयान करता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस बार तय समय में धान खरीदी पूरी नहीं हो पाएगी और लगभग 30 प्रतिशत किसान समय पर लाभ से वंचित रह सकते हैं। मीडिया से बातचीत में पीसीसी चीफ बदलने के सवाल पर भी उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है, अगर किसी को पता हो तो वही बताए।

इस बयानबाज़ी पर भाजपा की ओर से भी पलटवार हुआ। प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस और भूपेश बघेल राजनीति के लिए ही जाने जाते हैं और भाजपा सरकार में घोटालों को कोई जगह नहीं दी जा रही। उनके मुताबिक, जहां भी गड़बड़ी की जानकारी मिलती है, जांच के बाद कार्रवाई की जाती है।

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