डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या का ऐसा हिस्सा बन चुका है कि सुबह आंख खुलते ही और रात सोते वक्त तक स्क्रीन साथ रहती है। लेकिन यही आदत अब सेहत के लिए गंभीर चेतावनी बनती दिख रही है। AIIMS भोपाल की एक ताज़ा रिसर्च ने देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने और नींद की अनदेखी को लेकर चौंकाने वाले संकेत दिए हैं। इस अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक नींद पूरी न होना शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है और आगे चलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ा सकता है।
AIIMS भोपाल के बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार के अनुसार, जो लोग लगातार देर रात तक जागते हैं या रोज़ाना पर्याप्त नींद नहीं लेते, उनके शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है। हार्मोन की यह गड़बड़ी सीधे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है, जिससे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। यही कमजोरी लंबे समय में गंभीर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर की संभावना को भी बढ़ा सकती है।
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों की नींद का समय तय नहीं रहता, या जिनकी नींद बार-बार टूटती है, उनके शरीर की जैविक घड़ी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाती है। इसका असर केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, हार्मोनल डिसऑर्डर और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर की सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ने लगती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब इम्यून सिस्टम सही ढंग से काम नहीं करता, तब कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। AIIMS भोपाल की यह रिसर्च इसी ओर इशारा करती है कि नींद की अनदेखी करना भविष्य में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। खास बात यह है कि इस समस्या से सबसे ज्यादा युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है, जिनकी दिनचर्या देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने, ऑनलाइन गेम खेलने और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लगातार कंटेंट देखने के इर्द-गिर्द घूमती है।
डॉक्टरों ने लोगों को सचेत करते हुए कहा है कि रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और नियमित नींद बेहद जरूरी है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाना चाहिए। साथ ही, रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बेडरूम में मोबाइल न रखें, रात के समय नोटिफिकेशन बंद रखें और हल्की एक्सरसाइज, योग या ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें।
AIIMS भोपाल की यह रिसर्च साफ संकेत देती है कि नींद कोई विकल्प नहीं, बल्कि सेहत की बुनियाद है। छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर न सिर्फ नींद की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से भी खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।