छत्तीसगढ़ में शराब व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में आबकारी नीति 2026–27 को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के साथ ही यह साफ हो गया है कि राज्य में फिलहाल शराब नीति की मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। जो नीति पिछले वर्ष लागू थी, वही नीति आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेगी। हालांकि, इस निरंतरता के बीच एक अहम बदलाव जरूर देखने को मिलेगा, जो सीधे शराब की पैकिंग से जुड़ा है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार अब छत्तीसगढ़ में शराब कांच की बोतलों की जगह फाइबर की बोतलों में बेची जाएगी। मंत्रिपरिषद ने आबकारी नीति 2026–27 के प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए इससे जुड़ी सभी अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि मौजूदा नीति के तहत जो व्यवस्थाएं अब तक चल रही थीं, वे उसी रूप में आगे भी संचालित होती रहेंगी, बस पैकिंग के स्तर पर एक नया प्रयोग किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश के लगभग 10 राज्यों में पहले से ही फाइबर की बोतलों में शराब की बिक्री की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी उन राज्यों से इस व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी मंगाएगी और उसका अध्ययन करने के बाद यहां इसे लागू करेगी। बताया जा रहा है कि जिन फाइबर बोतलों का इस्तेमाल किया जाएगा, वे उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर से निर्मित होंगी और उनमें रखी शराब के सेवन से स्वास्थ्य पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि यह कदम सुरक्षा और प्रबंधन दोनों दृष्टि से उपयोगी साबित हो सकता है।
इस फैसले के साथ ही एक और बड़ी बात स्पष्ट हो गई है। हाल के महीनों में यह अटकलें तेज थीं कि राज्य सरकार आबकारी व्यवस्था में बदलाव कर शराब दुकानों को फिर से ठेकेदारी प्रथा के हवाले कर सकती है। लेकिन मंत्रिपरिषद के ताजा निर्णय ने इन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों का संचालन आगे भी पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में ही रहेगा। ठेका प्रणाली को दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
कुल मिलाकर, आबकारी नीति 2026–27 में जहां एक ओर निरंतरता बनाए रखने का फैसला लिया गया है, वहीं दूसरी ओर फाइबर बोतलों के रूप में एक नया बदलाव भी जोड़ा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार शराब नीति में बड़े प्रयोग से फिलहाल बचते हुए, छोटे लेकिन प्रभावी बदलावों के जरिए व्यवस्था को आगे बढ़ाना चाहती है।