घरेलू शेयर बाजार में आज 23 जनवरी को कमजोरी का माहौल देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली हावी रही, जिसके चलते सेंसेक्स करीब 100 अंक टूटकर 82,250 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी लगभग 30 अंक की गिरावट के साथ 25,250 के स्तर पर फिसल गया। बाजार की इस नरमी में बैंकिंग, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में दबाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां निवेशक मुनाफावसूली के मूड में नजर आए।
बाजार जानकारों का मानना है कि बजट से पहले इस तरह का उतार-चढ़ाव बना रहना असामान्य नहीं है। 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट को लेकर बाजार फिलहाल किसी बड़े संकेत की तलाश में है, लेकिन स्पष्ट दिशा के अभाव में निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इसी वजह से निवेशकों को फिलहाल चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित रहने और जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचने की सलाह दी जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू बाजार दबाव में है, वहीं ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में कोरिया, जापान, हॉन्गकॉन्ग और चीन के प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। अमेरिका में भी पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डेक और S&P 500 में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, जिससे वैश्विक स्तर पर सेंटीमेंट सकारात्मक बना हुआ है।
इसके बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस बिकवाली को काफी हद तक संभालने की कोशिश की है। पिछले कुछ महीनों से यह ट्रेंड देखने को मिल रहा है कि FIIs बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं DIIs लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा दे रहे हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि एक दिन पहले ही यानी 22 जनवरी को बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़कर बंद हुआ था और निफ्टी में भी मजबूत उछाल आया था। लेकिन बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता और सेक्टर-विशेष में बिकवाली के चलते आज बाजार फिर दबाव में आ गया।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में शेयर बाजार में स्थिरता से ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना नजर आ रही है। जब तक बजट से जुड़े संकेत साफ नहीं होते, तब तक निवेशकों को सावधानी, धैर्य और रणनीतिक निवेश पर फोकस बनाए रखना होगा।