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PhysicsWallah मानहानि मामला: दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त रुख, आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का अंतरिम आदेश

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ऑनलाइन एजुकेशन सेक्टर से जुड़ा एक अहम कानूनी मामला उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने PhysicsWallah से जुड़े मानहानि विवाद में बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया। शुक्रवार, 23 जनवरी को अदालत ने PhysicsWallah के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए कथित अपमानजनक और मानहानिकारक पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया। यह आदेश कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी द्वारा किए गए पोस्ट और वीडियो को लेकर पारित किया गया है, जिन पर कंपनी ने अपनी साख को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था।

इस मामले में PhysicsWallah ने अपने पूर्व कर्मचारी निखिल कुमार सिंह और कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ याचिका दायर की थी। कंपनी का कहना है कि पूर्व कर्मचारी ने सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से ऐसे गंभीर और भ्रामक आरोप लगाए, जिनसे न सिर्फ ब्रांड इमेज प्रभावित हुई, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया इस तरह के बयान और कंटेंट किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि PhysicsWallah के खिलाफ किए गए कथित मानहानिकारक कंटेंट को तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाए।

PhysicsWallah की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व कर्मचारी द्वारा किए गए पोस्ट और वीडियो न केवल आपत्तिजनक हैं, बल्कि उनमें कंपनी को ‘घोटाला’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया है, जो पूरी तरह से असत्य और दुर्भावनापूर्ण हैं। कंपनी ने मानहानि के बदले 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।

अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत देते हुए कंटेंट हटाने का आदेश दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि आरोपों पर आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मानहानि के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदार अभिव्यक्ति की सीमा तय करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह फैसला न सिर्फ कंपनियों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में मिसाल बनेगा, बल्कि यह भी साफ संदेश देगा कि सोशल मीडिया की आज़ादी के साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

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