बलौदाबाजार जिले के भाटापारा तहसील अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी में गुरुवार को हुए भीषण औद्योगिक हादसे के बाद कारखाना प्रबंधन ने मृतकों और घायलों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार इस दुर्घटना में छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर स्थित बर्न एवं ट्रीटमेंट सेंटर रेफर किया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं प्रशासन और प्रबंधन दोनों ही स्थिति को संभालने में जुटे हैं।
कारखाना प्रबंधन की ओर से घोषित मुआवजे के अनुसार प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिजनों को 20 लाख रुपये और प्रत्येक गंभीर रूप से घायल श्रमिक के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त मृतक श्रमिकों के परिजनों को कर्मचारी क्षतिपूर्ति कोष से औसतन 10 लाख रुपये तथा कर्मचारी राज्य बीमा निगम के माध्यम से पेंशन के रूप में आने वाले वर्षों में औसतन लगभग 15 लाख रुपये प्राप्त होंगे। इस तरह कुल मिलाकर प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिवार को औसतन करीब 45 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलने की बात कही गई है। वहीं घायल श्रमिकों को 5 लाख रुपये के मुआवजे के साथ-साथ कर्मचारी राज्य बीमा निगम के माध्यम से कार्य पर लौटने तक नियमानुसार जीवनयापन भत्ता भी दिया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सुरक्षा के मद्देनज़र प्लांट पर आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। फिलहाल प्लांट परिसर और उसके आसपास की कानून-व्यवस्था पूरी तरह शांतिपूर्ण बताई जा रही है, जबकि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।
इस दर्दनाक घटना में जान गंवाने वाले मजदूरों में विनय भुईया (39), बद्री भुईया (52), सुंदर भुईया (49), श्रवण भुईया (22), जितेंद्र भुईया (37) और राजदेव भुईया (22) शामिल हैं। सभी मृतक बिहार के ग्राम गोटीबांध के निवासी बताए गए हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में छत्तीसगढ़ आए थे। वहीं घायल श्रमिकों में रामू भुईया (37) और कल्फु भुईया (45), दोनों बिहार के ग्राम गोटीबांध निवासी हैं, जबकि सराफत अंसारी (32), मुमताज अंसारी (26) और साबिर अंसारी (34) झारखंड के ग्राम राजहरा के रहने वाले हैं।
हादसे के बाद यह घटना एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और मजदूरों की कार्यस्थल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हालांकि मुआवजे की घोषणा से प्रभावित परिवारों को कुछ आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों के लिए यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता। प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर अब सभी की नजर टिकी हुई है।