अक्सर ऐसा होता है कि सर्दी-खांसी होने पर हम दवाइयां तो लेते हैं, लेकिन छींकें रुकने का नाम नहीं लेतीं, गले में जलन बनी रहती है और खांसी बार-बार परेशान करती है। शरीर में भारीपन और सुस्ती अलग से महसूस होती है। ऐसी स्थिति में अगर दवाओं के साथ कोई भरोसेमंद घरेलू उपाय मिल जाए, तो राहत जल्दी मिल सकती है।
घर में आसानी से मिलने वाला अदरक इस परेशानी में काफी कारगर माना जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है। अदरक गले में जमे कफ को ढीला करता है, जिससे खांसी में आराम मिलता है और सूजन व दर्द भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। सर्दी के मौसम में इसका सेवन शरीर को राहत देने का काम करता है।
वहीं शहद अपने औषधीय गुणों के कारण गले की खराश और जलन में जल्दी असर दिखाता है। यह न सिर्फ खांसी को शांत करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी देता है, जिससे कमजोरी कम महसूस होती है। यही वजह है कि पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शहद का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है।
जब अदरक और शहद को एक साथ लिया जाता है, तो इन दोनों के फायदे और बढ़ जाते हैं। अदरक जहां कफ को बाहर निकालने में मदद करता है, वहीं शहद गले पर एक सुरक्षात्मक परत बनाकर जलन और खराश से राहत देता है। यह मिश्रण बंद नाक, गले की जलन और रुक-रुक कर आने वाली खांसी में भी आराम पहुंचा सकता है।
इसे लेने का तरीका भी बेहद आसान है। अदरक का छोटा सा टुकड़ा कद्दूकस करके या उसका रस निकालकर उसमें एक चम्मच शहद मिला लें। इस मिश्रण को दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। खाली पेट या रात में सोने से पहले इसका सेवन करने पर ज्यादा फायदा महसूस होता है।
हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। ज्यादा अदरक लेने से पेट में जलन हो सकती है। छोटे बच्चों को शहद देने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर सर्दी-खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बुखार आ जाए या हालत बिगड़ती लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सिर्फ घरेलू उपाय ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव भी सर्दी-खांसी से बचाव में मदद करते हैं। ठंडे पानी से परहेज, गर्म कपड़े पहनना, भरपूर आराम करना और दिनभर गुनगुना पानी पीना शरीर को जल्दी ठीक होने में सहायक होता है। दवाओं के साथ अदरक और शहद का यह नुस्खा अपनाकर आप गले को राहत दे सकते हैं और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बना सकते हैं।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य घरेलू अनुभव पर आधारित है। किसी भी गंभीर या लंबे समय तक चलने वाली समस्या में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।)