छत्तीसगढ़ जब अस्तित्व में आया था, तब संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद उसे एक अविकसित राज्य के रूप में देखा जाता था। प्रशासनिक ढांचे की कमी, राजधानी का अस्थायी स्वरूप, जिलों का पुनर्गठन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव—ये सभी उस दौर की बड़ी चुनौतियाँ थीं। लेकिन बीते 25 वर्षों में राज्य ने जिस तरह खुद को बदला है, वह सुशासन और दूरदर्शी नीतियों की मिसाल बन चुका है। आज छत्तीसगढ़ एक मजबूत, स्थिर और विकासोन्मुख राज्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है।
राज्य गठन के बाद सबसे बड़ी जरूरत एक सशक्त प्रशासनिक नींव खड़ी करने की थी। शुरुआती वर्षों में अस्थायी व्यवस्थाओं के बीच विधानसभा संचालन से लेकर नए विभागों के गठन तक हर फैसला एक नई दिशा तय कर रहा था। संगठित और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचे ने शासन को स्थिरता दी और राज्य को आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला। यही नींव आगे चलकर विकास की इमारत बनी।
अटल नगर, यानी नवा रायपुर, इस परिवर्तन का सबसे जीवंत उदाहरण है। एक सुनियोजित, आधुनिक और स्मार्ट राजधानी के रूप में नवा रायपुर को विकसित किया गया, जहां चौड़ी सड़कें, डिजिटल प्रशासन, आधुनिक भवन और हरित विकास का संतुलन दिखाई देता है। यह राजधानी सिर्फ ईंट-पत्थरों का शहर नहीं, बल्कि आधुनिक शासन व्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में वनों की भूमिका हमेशा से अहम रही है। वनोपज को सिर्फ परंपरागत साधन न मानकर आजीविका का मजबूत आधार बनाया गया। तेंदूपत्ता के दामों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या में विस्तार से लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी आय का साधन मिला। वन धन जैसी योजनाओं ने विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा।
जल जीवन मिशन के जरिए गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना भी तेजी से साकार हुआ। लाखों ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन और हजारों गांवों में शत-प्रतिशत कवरेज ने ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को बदल दिया। पानी अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सम्मान का प्रतीक बन गया है।
पर्यटन के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने अपनी अलग पहचान बनाई। चित्रकोट जैसे प्राकृतिक स्थलों के विकास ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली। यह मॉडल विकास और प्रकृति के संतुलन का उदाहरण बन गया है।
ग्रामीण सड़कों के विस्तार ने राज्य की तस्वीर ही बदल दी। हजारों किलोमीटर नई सड़कों ने दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा। शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों ने विकास के साथ-साथ सुरक्षा को भी मजबूती दी।
कृषि छत्तीसगढ़ की पहचान रही है और किसानों को केंद्र में रखकर नीतियाँ बनाई गईं। धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता, ऑनलाइन भुगतान और समर्थन मूल्य में सुधार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा दी। सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार ने खेती को ज्यादा स्थायी और लाभकारी बनाया।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी व्यापक बदलाव देखने को मिला। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर इलाज का भरोसा दिया। जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया।
शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर देकर युवाओं को भविष्य के लिए तैयार किया गया। नए विश्वविद्यालय, कॉलेज, आईटीआई और कौशल केंद्रों ने रोजगार-उन्मुख शिक्षा को बढ़ावा दिया। उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित युवाओं ने राज्य की मानव पूंजी को सशक्त बनाया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और सुरक्षा को साथ लेकर चलने की नीति ने भरोसे का माहौल बनाया। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और शासन-जन संवाद ने इन क्षेत्रों में स्थायी परिवर्तन की नींव रखी।
औद्योगिक मोर्चे पर छत्तीसगढ़ अब सिर्फ खनिज आधारित राज्य नहीं रहा। नई औद्योगिक नीति ने निवेश के नए द्वार खोले। सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और हरित उद्योगों की दिशा में बढ़ते कदम राज्य को नवाचार का केंद्र बना रहे हैं। डिजिटल प्रक्रियाओं और सिंगल विंडो सिस्टम ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई ऊंचाई दी है।
आज छत्तीसगढ़ हरित ऊर्जा, ई-वाहन, सौर ऊर्जा और जैव ईंधन जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहा है। महिला कारीगरों, स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्यमों की भागीदारी ने विकास को समावेशी स्वरूप दिया है।
25 वर्षों की यह यात्रा बताती है कि सही नीतियों, ईमानदार प्रयासों और जनसरोकारों के साथ कोई भी राज्य अपनी तकदीर बदल सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब आत्मनिर्भरता, नवाचार और संतुलित विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है—और आने वाला समय इस प्रगति को और नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला है।