जरूरत की खबर: टॉयलेट सीट नहीं, ये रोज़मर्रा की चीजें हैं सबसे ज्यादा गंदी—बीमारियों का बढ़ता खतरा समझिए

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अक्सर जब घर की सबसे गंदी जगह की बात होती है, तो दिमाग सीधे टॉयलेट सीट पर चला जाता है। हम उसकी सफाई को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं, लेकिन जिन चीजों को दिनभर हाथ लगाते हैं, खाते-पीते समय छूते हैं या चेहरे के बिल्कुल पास ले जाते हैं, उन्हें लगभग नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यहीं सबसे बड़ी भूल होती है। कई रिसर्च और मेडिकल स्टडीज़ साफ बताती हैं कि रोज़मर्रा की ये आम सतहें कई बार टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा बैक्टीरिया से भरी होती हैं—और यहीं से बीमारियों का असली खतरा शुरू होता है।

टीवी रिमोट इसका सबसे आम उदाहरण है। खाते-पीते समय वही रिमोट बार-बार हाथ में आता है, लेकिन उसकी सफाई शायद ही कभी होती है। सर्वे बताते हैं कि रिमोट टॉयलेट सीट से कई गुना ज्यादा गंदा हो सकता है। किचन में इस्तेमाल होने वाला कटिंग बोर्ड भी उतना ही खतरनाक है, खासकर जब उसी बोर्ड पर सब्ज़ी, फल और कच्चा मांस काटा जाता है। रिसर्च के मुताबिक एक कटिंग बोर्ड में टॉयलेट सीट से सैकड़ों गुना ज्यादा फीकल बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो सीधे फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।

मोबाइल फोन तो मानो बैक्टीरिया का चलता-फिरता घर है। दिनभर हाथ में रहने वाला फोन कई लोग टॉयलेट तक ले जाते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि स्मार्टफोन टॉयलेट सीट से कई गुना ज्यादा गंदा हो सकता है, क्योंकि वॉशरूम के जर्म्स सीधे स्क्रीन और कवर पर ट्रांसफर हो जाते हैं। इसी तरह सोते समय पसीना, लार और डेड स्किन सेल्स से भरा पिलो कवर अगर नियमित न धोया जाए, तो बैक्टीरिया और फंगस का अड्डा बन जाता है।

किचन स्पॉन्ज को तो वैज्ञानिक तौर पर घर की सबसे गंदी चीज़ माना गया है। इसमें ई-कोलाई और साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिनकी संख्या टॉयलेट सीट से हजारों गुना तक हो सकती है। ऑफिस या घर का की-बोर्ड भी कम खतरनाक नहीं है। खाने के कण, धूल और हाथों के जर्म्स मिलकर इसे बैक्टीरिया का हॉटस्पॉट बना देते हैं। दरवाज़ों के हैंडल, नल, लाइट स्विच और लिफ्ट के बटन दिनभर सैकड़ों हाथों से छुए जाते हैं, लेकिन इनकी सफाई पर शायद ही ध्यान दिया जाता है। ऑफिस डेस्क भी स्टडीज़ में टॉयलेट सीट से कई गुना कम हाइजीनिक पाई गई है।

टूथब्रश को हम साफ मान लेते हैं, लेकिन रिसर्च बताती है कि इसमें भी लाखों बैक्टीरिया हो सकते हैं, खासकर अगर उसे गीली जगह पर रखा जाए। पालतू जानवरों के खाने के बर्तन भी बेहद गंदे होते हैं—यहां टॉयलेट सीट से कई गुना ज्यादा बैक्टीरिया पाए गए हैं।

इन सभी सतहों पर मौजूद जर्म्स शरीर में पहुंचकर पेट के संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, त्वचा की समस्याएं, आंख-नाक-गले के इंफेक्शन और इम्यूनिटी से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और साझा जगहों में काम करने वाले लोग इस खतरे की चपेट में जल्दी आते हैं।

अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी समझदारी और नियमित सफाई से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मोबाइल और रिमोट को हफ्ते में कई बार अल्कोहल-बेस्ड वाइप से साफ करना, कटिंग बोर्ड को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी से धोना, किचन स्पॉन्ज को समय-समय पर बदलना, की-बोर्ड और ऑफिस डेस्क को नियमित डिसइंफेक्ट करना, पिलो कवर साप्ताहिक धोना, डोर हैंडल और स्विच पोंछना, टूथब्रश को सही जगह पर रखना और हर कुछ महीनों में बदलना, पालतू जानवरों के बर्तन रोज़ धोना—ये सभी आदतें मिलकर हमारी सेहत की मजबूत ढाल बनाती हैं।

दरअसल, डेली लाइफ की हेल्दी हाइजीन हैबिट्स कोई बहुत बड़ी चीज नहीं हैं। खाना बनाने और खाने से पहले हाथ धोना, बाहर से आने के बाद हाथ-चेहरा साफ करना, मोबाइल को टॉयलेट में इस्तेमाल न करना, किचन और बेडरूम की चीजें अलग-अलग रखना, गीली चीजों को तुरंत सुखाना, और साफ-सफाई को आदत बनाना—ये छोटे कदम बड़ी बीमारियों से बचा सकते हैं।

निष्कर्ष साफ है: सबसे गंदी जगह हमेशा वही नहीं होती, जो हमें गंदी दिखती है। असली खतरा उन चीजों में छिपा होता है, जिन्हें हम रोज़ छूते हैं और साफ करना भूल जाते हैं। थोड़ी-सी जागरूकता और नियमित हाइजीन से हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

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