लगातार तीन सत्रों की मजबूती के बाद शुक्रवार को शेयर बाजार की रफ्तार अचानक थम गई। आईटी और मेटल शेयरों में तेज बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत और 1 फरवरी को आने वाले यूनियन बजट से पहले बढ़ी सतर्कता ने बाजार पर दबाव बना दिया। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की ताजा बिकवाली ने भी सेंटीमेंट को कमजोर किया।
दोपहर करीब 1:50 बजे बाजार में गिरावट साफ नजर आई। सेंसेक्स करीब 400 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 25,300 के आसपास फिसल गया। हालांकि गिरावट के बीच यह राहत की बात रही कि मार्केट ब्रेड्थ पॉजिटिव बनी रही, यानी बड़ी संख्या में शेयरों में अब भी खरीदारी देखने को मिली, लेकिन भारीवजन वाले सेक्टर्स ने इंडेक्स को नीचे खींच लिया।
सबसे ज्यादा मार मेटल शेयरों पर पड़ी। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 4 फीसदी तक टूट गया। Hindalco, Tata Steel और Coal India जैसे दिग्गज शेयरों में 5 से 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट कुछ डिफेंसिव और कंज्यूमर शेयरों में हल्की मजबूती दिखी, जहां Apollo Hospitals और Tata Consumer Products में करीब 2 फीसदी तक की तेजी रही।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली मानी जा रही है। पिछले तीन सत्रों की तेज रैली के बाद निवेशकों ने मेटल शेयरों में कमाई काटना बेहतर समझा। ग्लोबल एक्सपर्ट्स के मुताबिक डॉलर में मजबूती, ओवरबॉट हालात और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंका से बेस मेटल की कीमतों में नरमी आई है। इसका सीधा असर भारतीय मेटल शेयरों पर पड़ा। आईटी सेक्टर भी दबाव में रहा और इंडेक्स करीब 2 फीसदी तक टूट गया। अमेरिकी बाजार में नैस्डैक की कमजोरी का असर घरेलू आईटी शेयरों पर साफ दिखा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। ब्रेंट क्रूड करीब 5 महीने के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की आशंका से सप्लाई बाधित होने का डर है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है, इसलिए बाजार इसे नकारात्मक संकेत के तौर पर देख रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशक भी जनवरी में ज्यादातर सत्रों में नेट सेलर रहे हैं। बजट से पहले एक बार फिर उनकी बिकवाली शुरू होने से बाजार पर दबाव बढ़ा है। यूनियन बजट के दिन भले ही स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा गया हो, लेकिन उससे पहले निवेशक जोखिम कम करते हुए पोजिशन हल्की कर रहे हैं।
वैश्विक संकेत भी फिलहाल बाजार के पक्ष में नहीं हैं। एशियाई बाजारों में जापान, चीन और हांगकांग के इंडेक्स लाल निशान में रहे, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछली रात कमजोरी के साथ बंद हुए। इसी बीच इंडिया विक्स करीब 4 फीसदी चढ़कर 13.85 तक पहुंच गया, जो आने वाले दिनों में बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत दे रहा है।
कुल मिलाकर, बाजार की यह गिरावट तेजी के बाद एक स्वाभाविक ठहराव मानी जा रही है। बजट से पहले अनिश्चितता और वैश्विक दबाव के बीच निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने के बजाय सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।