भारत में दिन की शुरुआत अक्सर एक कप चाय और एक चम्मच चीनी से होती है। आंकड़े बताते हैं कि देश की 80% से ज्यादा आबादी रोज़ाना चाय पीती है, लेकिन चीनी की कहानी सिर्फ चाय तक सीमित नहीं रहती। बिस्किट, मिठाई, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड—हर जगह शुगर छुपी हुई है। पिछले कुछ सालों में जब चीनी के नुकसान पर खुलकर चर्चा शुरू हुई, तो लोगों ने व्हाइट शुगर से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसी दौरान ब्राउन शुगर को ‘हेल्दी ऑप्शन’ मानने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा।
लेकिन सच्चाई यह है कि ब्राउन शुगर को लेकर फैली ज्यादातर बातें सिर्फ मिथ हैं। रंग और स्वाद के फर्क के बावजूद ब्राउन और व्हाइट शुगर शरीर पर लगभग एक जैसा असर डालती हैं। फर्क बस इतना है कि ब्राउन शुगर में थोड़ी-सी मोलासेस होती है, जो उसे गहरा रंग और हल्का कैरामेल जैसा स्वाद देती है। न्यूट्रिशन के स्तर पर दोनों में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट लगभग बराबर होते हैं, और दोनों ही ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाती हैं।
अक्सर लोग सोचते हैं कि ब्राउन शुगर ज्यादा नेचुरल है और इसमें मिनरल्स होते हैं, इसलिए यह सुरक्षित होगी। हकीकत यह है कि मोलासेस की मात्रा इतनी कम होती है कि उससे मिलने वाला कोई भी मिनरल सेहत के लिए मायने नहीं रखता। यानी ब्राउन शुगर खाने से न तो डायबिटीज का खतरा कम होता है और न ही वजन बढ़ने की समस्या रुकती है। अगर लाइफस्टाइल सिडेंटरी है, डायबिटीज या प्री-डायबिटीज है, तो ब्राउन शुगर भी उतनी ही नुकसानदेह है जितनी व्हाइट शुगर।
ब्लड शुगर के लिहाज से देखें तो दोनों शुगर शरीर में जाकर ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में बदलती हैं। इसका सीधा असर इंसुलिन पर पड़ता है। ज्यादा मात्रा में लेने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है। यही वजह है कि डायबिटिक लोगों के लिए ब्राउन शुगर भी सुरक्षित विकल्प नहीं मानी जाती। चाय-कॉफी में व्हाइट की जगह ब्राउन शुगर लेने से सिर्फ स्वाद बदलता है, सेहत में कोई बड़ा फायदा नहीं मिलता।
असल जरूरत शुगर का रंग बदलने की नहीं, बल्कि उसकी मात्रा कम करने की है। एडेड शुगर शरीर को सिर्फ खाली कैलोरी देती है, पोषण नहीं। लंबे समय तक ज्यादा शुगर लेने से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और दांतों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रोज़ करीब 2000 कैलोरी लेता है, तो उसे दिनभर में 1–2 चम्मच से ज्यादा एडेड शुगर नहीं लेनी चाहिए।
निष्कर्ष साफ है—ब्राउन शुगर को हेल्दी समझकर बेझिझक खाना खुद को धोखा देना है। सेहत सुधारनी है तो व्हाइट या ब्राउन में उलझने के बजाय शुगर की कुल मात्रा घटाना ही सबसे सही रास्ता है।