Meta Pixel

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं: RBI ने 5.25% पर ब्याज दरें बरकरार रखीं, आम लोगों को लोन मोर्चे पर राहत

Spread the love

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है। Reserve Bank of India ने मौजूदा मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे होने का खतरा नहीं है। साथ ही बैंक एफडी और अन्य जमा दरों में भी किसी बड़े बदलाव की संभावना कम बनी हुई है।

6 फरवरी को हुई Monetary Policy Committee की बैठक में RBI ने यह भी साफ किया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई के अनुमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। FY26 के लिए हेडलाइन CPI महंगाई करीब 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पहले के 2 प्रतिशत के अनुमान के लगभग बराबर है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल देश में कीमतों पर दबाव नियंत्रण में बना हुआ है।

RBI के मुताबिक, बीते कुछ महीनों में महंगाई का असर काफी हद तक कम हुआ है। नवंबर और दिसंबर में महंगाई दर RBI के तय टॉलरेंस बैंड से नीचे रही, जिसे केंद्रीय बैंक ने कीमतों में स्थिरता का मजबूत संकेत बताया। यही वजह है कि ब्याज दरों में फिलहाल किसी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया गया है।

हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि आगे चलकर महंगाई में धीरे-धीरे बढ़त देखने को मिल सकती है। RBI के अनुमान के अनुसार FY26 की चौथी तिमाही में महंगाई 3.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं FY27 की पहली तिमाही में CPI महंगाई 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। RBI का मानना है कि कीमती धातुओं की ऊंची कीमतें और घरेलू मांग में सुधार आगे चलकर महंगाई को थोड़ा ऊपर ले जा सकते हैं।

ब्याज दरों की बात करें तो MPC ने सर्वसम्मति से सभी प्रमुख दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर कायम रहेगा, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5 प्रतिशत और बैंक रेट 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखे गए हैं। RBI ने अपना न्यूट्रल रुख भी जारी रखा है, यानी आगे के फैसले पूरी तरह महंगाई और आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

वैश्विक मोर्चे पर अनिश्चितताओं के बावजूद RBI ने भारत की आर्थिक ग्रोथ को लेकर भरोसा जताया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ संभावित नए व्यापार समझौते लंबे समय में भारत की विकास रफ्तार को मजबूती दे सकते हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी जोखिमों को लेकर सतर्कता भी जरूरी बताई गई है।

RBI ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखेगा। इसके साथ ही जल्द ही GDP और महंगाई से जुड़ी नई डेटा सीरीज़ जारी करने के संकेत भी दिए गए हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति की और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *