OverThinking: दिमाग की उलझन कैसे बने क्लैरिटी, डॉक्टर ने बताए आसान लेकिन असरदार स्टेप्स

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आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में ओवरथिंकिंग चुपचाप हमारी मानसिक सेहत को घेर लेती है। किसी एक बात पर बार-बार, ज़रूरत से ज़्यादा और नकारात्मक ढंग से सोचना धीरे-धीरे तनाव बढ़ाता है, काम पर फोकस तोड़ता है और नींद तक छीन लेता है। इसी परेशानी पर डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के ज़रिए बेहद सरल लेकिन प्रभावी तरीका साझा किया है—जिसे अपनाकर दिमाग को शांति की तरफ मोड़ा जा सकता है।

डॉक्टर शालिनी का कहना है कि ओवरथिंकिंग कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक आदत है—और आदत बदली जा सकती है। सबसे पहले दिमाग में चल रहे विचारों को काग़ज़ पर उतारने की सलाह दी जाती है। जब डर, उलझन या आशंका लिख दी जाती है, तो मन हल्का होता है और बेचैनी का आधा बोझ वहीं उतर जाता है। इसके बाद आता है ‘3 मिनट रूल’—अगर कोई समस्या तीन मिनट में हल नहीं हो रही, तो उस पर सोचना रोक दें और उसे तय समय के लिए टाल दें। इससे दिमाग अनावश्यक चक्कर से बाहर निकलता है।

एक दिलचस्प तरीका ‘टाइम बॉक्सिंग’ भी है। दिन में सिर्फ़ 10 मिनट का समय तय करें, उसी में सोचें—पूरी आज़ादी के साथ। बाकी समय दिमाग को साफ़-साफ़ मना कर दें। यह अभ्यास धीरे-धीरे मन को सिखाता है कि कब सोचना है और कब रुकना है। इसके साथ ‘सेल्फ-कंपैशन’ यानी खुद के प्रति दयालु होना बेहद ज़रूरी है। खुद को कोसने के बजाय अपने आप से एक अच्छे दोस्त की तरह बात करें—यह आदत मानसिक ताक़त बढ़ाती है और तनाव घटाती है।

नकारात्मक विचारों के शोर को शांत करने में पॉज़िटिव अफ़र्मेशन्स और ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ का भी बड़ा रोल है। रोज़ खुद से कहें—“मैं शांत हूँ, सब ठीक है।” साथ ही 10 मिनट का मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग करें। गहरी साँसें लेने से स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और दिमाग को साफ़ संकेत मिलता है कि अब आराम का समय है—यही संकेत बेहतर नींद का रास्ता खोलता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, इन छोटे-छोटे स्टेप्स को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उतारने से ओवरथिंकिंग का पैटर्न टूटता है। जब विचारों पर नियंत्रण आता है, तो कन्फ्यूज़न क्लैरिटी में बदलने लगता है—और मानसिक शांति फिर से लौट आती है।

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